HC का NHRC से सवाल: मुस्लिम हिंसा की अनदेखी और मदरसों की जांच में दिलचस्पी क्यों?
नई दिल्ली । डेस्क: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है. कोर्ट ने आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि NHRC उन गंभीर मुद्दों की अनदेखी कर रहा है जो वास्तव में उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जैसे कि सांप्रदायिक हिंसा और मॉब लिंचिंग (विजिलेंटे वायलेंस), जबकि वह उन मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है जो उसके कार्यक्षेत्र से बाहर प्रतीत होते हैं.
यह मामला 'टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया' द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है.
याचिका में NHRC के फरवरी 2025 के उस निर्देश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश के 558 सहायता प्राप्त मदरसों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से कराने को कहा गया था.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त लहजे में पूछा कि जब देश में मानवाधिकारों के उल्लंघन और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हो रही हैं, तब आयोग मदरसों के अनुदान और शिक्षकों की नियुक्तियों जैसे प्रशासनिक व वित्तीय मामलों में क्यों उलझा हुआ है.
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से NHRC के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) पर सवाल उठाते हुए इस मामले में आयोग की भूमिका को संदिग्ध बताया.