इलाहाबाद HC का फैसला- सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं
प्रयागराज । डेस्क: प्रयागराज स्थित टैगोर पब्लिक स्कूल की 11वीं कक्षा की एक मुस्लिम छात्रा द्वारा स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब (स्कार्फ) पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने 21 अगस्त 2026 को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लाम धर्म का ऐसा अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जिसके बिना किसी का धर्म खतरे में पड़ जाए.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता छात्रा के अलावा उसी समुदाय की अन्य किसी छात्रा ने स्कूल में स्कार्फ नहीं पहना था.
हाईकोर्ट ने पूर्व में बॉम्बे हाईकोर्ट और कर्नाटक हाईकोर्ट द्वारा हिजाब पर दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह विवाद धार्मिक स्वतंत्रता का न होकर केवल संस्थागत अनुशासन का है. कोर्ट के अनुसार, यदि प्रत्येक छात्र को अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के आधार पर यूनिफॉर्म बदलने की अनुमति दी गई, तो इससे स्कूल का अनुशासन और यूनिफॉर्म की मूल अवधारणा ही खत्म हो जाएगी.
मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, "हमने याचिकाकर्ता से संबंधित विभिन्न कक्षाओं की तस्वीरों का अवलोकन किया है. याचिकाकर्ता के अलावा, कोई भी अन्य छात्रा, यहाँ तक कि याचिकाकर्ता के ही धर्म से संबंधित छात्राएं भी हेडस्कार्फ (हिजाब) नहीं पहन रही हैं. जहाँ भी यह मुद्दा उठा है, उच्च न्यायालयों का एकमत विचार रहा है कि सिर पर स्कार्फ पहनना एक महिला के लिए इस्लामिक आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है, जिसके अभाव में आस्था खतरे में पड़ जाएगी."
उच्च न्यायालय ने आगे कहा, "इस मामले में स्कूल याचिकाकर्ता की धार्मिक स्वतंत्रता को बिल्कुल भी सीमित करने का प्रयास नहीं करता है. वे केवल संस्थागत अनुशासन का पालन चाहते हैं, जिसका एक अनिवार्य हिस्सा यूनिफॉर्म है. यदि व्यक्तिगत छात्रों को व्यक्तिपरक आधारों पर निर्धारित यूनिफॉर्म में थोड़ा सा भी बदलाव करने की अनुमति दी जाती है, तो यह यूनिफॉर्म के विचार के विपरीत होगा. यह स्कूल के अनुशासन को निर्धारित करने का अधिकार संस्था से छीनकर व्यक्तिगत छात्रों को सौंप देगा."