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MP-HC: अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी संस्थापक की संपत्ति के विध्वंस पर लगाई रोक

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22 नव. 2025, 01:34 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

हाईकोर्ट
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इंदौर । डेस्क: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी की इंदौर स्थित पैतृक संपत्ति को गिराने के मऊ छावनी बोर्ड के फैसले पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी है.


न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा ने याचिकाकर्ता अब्दुल मजीद (जो वर्तमान में मकान के कब्ज़े में हैं) को निर्देश दिया कि वे 15 दिनों के भीतर छावनी बोर्ड द्वारा जारी किए गए विध्वंस नोटिस का जवाब, सभी प्रासंगिक दस्तावेज़ों के साथ, प्रस्तुत करें.


कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि जवाब दाखिल होने के बाद, अधिकारियों द्वारा 'स्पीकिंग ऑर्डर' (कारण बताते हुए आदेश) पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किया जाएगा. कोर्ट ने 20 नवंबर को आदेश दिया, “जब तक उक्त कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती और उसके बाद दस दिनों की अवधि के लिए, यदि आदेश याचिकाकर्ता के खिलाफ जाता है, तो उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी.”


अल-फ़लाह यूनिवर्सिटी हाल ही में तब सुर्खियों में आई जब वहां काम करने वाले मेडिकल प्रोफेशनलों को दिल्ली कार बम विस्फोट मामले और बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थों की बरामदगी के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया. यूनिवर्सिटी के कामकाज से जुड़े एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सिद्दीकी वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में हैं.


मऊ छावनी बोर्ड ने 19 नवंबर को इस संपत्ति को गिराने का नोटिस जारी किया था, जो मूल रूप से सिद्दीकी के पिता की थी. आरोप था कि भवन के कुछ हिस्से बिना किसी प्राधिकरण के बनाए गए थे.


गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि छावनी बोर्ड ने याचिकाकर्ता को निर्माण हटाने के लिए केवल तीन दिन का समय दिया था, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है. यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना ही सीधे हटाने का आदेश पारित कर दिया गया था.


कोर्ट ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता को 1996-97 में भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए थे, और अब एक नया नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट ने कहा, “यदि पिछले नोटिस जारी होने की तारीख से लगभग 30 वर्षों की अवधि के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई कार्रवाई की जानी थी, तो उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था,” और इसी आधार पर याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत दी गई.


अदालत ने गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना याचिका का निपटारा कर दिया.


याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगड़िया के साथ अधिवक्ता रिजवान खान और प्रतिवादियों की ओर से अधिवक्ता आशुतोष निमगांवकर उपस्थित हुए.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP