GST 2.0: छोटे केमिस्ट पर भारी बोझ, AIOCD ने मांगी तत्काल राहत
मुंबई । डेस्क: ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD), जो देशभर के 12.5 लाख से अधिक केमिस्ट और वितरकों का प्रतिनिधित्व करता है, ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से तत्काल कार्रवाई की मांग की है ताकि हालिया जीएसटी 2.0 दरों में कटौती से छोटे रिटेलर्स को होने वाले भारी वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके.
इन प्रभावित रिटेलर्स का एक बड़ा हिस्सा या तो जीएसटी के तहत पंजीकृत ही नहीं है या कंपोजिशन डीलर के रूप में काम करता है, जिसका मतलब है कि वे इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करके अपनी हानि को ऑफसेट नहीं कर सकते. इससे वे पूरी तरह से नुकसान की स्थिति में फंस गये हैं, जहां उन्हें पुरानी स्टॉक को कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जबकि उन्होंने पहले ही सरकार को उच्च कर चुकाया हुआ है. यह स्थिति ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के केमिस्ट के लिए विशेष रूप से गंभीर है, जो पहले से ही बहुत कम मार्जिन पर काम कर रहे हैं.
उपभोक्ताओं को होने वाले लाभ को स्वीकार करते हुए, संगठन ने चेतावनी दी है कि इस सुधार के संक्रमण काल में छोटे दवा व्यापारियों की जीविका पर अनुचित प्रभाव पड़ रहा है. समस्या का मूल पुरानी इन्वेंटरी में है, जो उच्च कर दरों पर खरीदी गई थी, लेकिन अब कम कीमतों पर बेचनी पड़ रही है (18% से 5%, 12% से 0% और 12% से 5% जीएसटी दरों में कमी के कारण).
AIOCD के अध्यक्ष जे एस शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने जोर दिया कि चूंकि दवाओं के मार्जिन नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) द्वारा सख्ती से नियंत्रित हैं, इसलिए ये छोटे व्यापारी कर अंतर को सह नहीं कर पा रहे और अनिवार्य वित्तीय झटके झेल रहे हैं.
AIOCD ने वर्तमान रिवायत पर दुख व्यक्त किया है, यह नोट करते हुए कि सरकारी अधिकारी और राजनीतिक नेता जीएसटी राहत से उपभोक्ताओं को होने वाले लाभ को सक्रिय रूप से प्रचारित कर रहे हैं, इन छोटे रिटेलर्स की दुर्दशा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है. संगठन का तर्क है कि भारत के रिटेल दवा व्यापार की रीढ़ माने जाने वाले इन छोटे व्यवसायों को इस ऐतिहासिक संक्रमण का पूरा खर्चा वहन करने के लिए मजबूर करना अन्यायपूर्ण और असम्भव है.
इन कमजोर छोटे व्यापारियों की रक्षा करने और बड़े पैमाने पर दुकानों के बंद होने से रोकने के लिए, AIOCD ने दो मुख्य मांगें रखी हैं. सबसे पहले, उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि पाइपलाइन वाली दवा स्टॉक को पुरानी अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर तीन महीने के संक्रमण काल के लिए बेचने की अनुमति दी जाए. इससे उच्च-कर वाली मौजूदा इन्वेंटरी को बिना अतिरिक्त नुकसान के समाप्त किया जा सकेगा.
वैकल्पिक रूप से, ज्ञापन में इन छोटे व्यापारियों और केमिस्ट को झेले गए अनिवार्य नुकसान को वित्तीय रूप से ऑफसेट करने के लिए एक विशेष राहत तंत्र या पैकेज की घोषणा की मांग की गई है. इसके अलावा, AIOCD ने इस कठिन संक्रमण के दौरान छोटे रिटेलर्स के खिलाफ कोई उत्पीड़न या दंडात्मक कार्रवाई न करने की अवधि की मांग की है.
AIOCD ने कड़ी चेतावनी जारी की है कि त्वरित और तत्काल राहत के बिना, कई छोटे केमिस्ट बंद होने के लिए मजबूर हो सकते हैं. इससे, उन्होंने आगाह किया है, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में गंभीर व्यवधान होगा, खासकर दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में.