AI: भारत में नौकरियां बढ़ रही हैं, लेकिन फ्रेशर्स के लिए बंद हो रहे हैं रास्ते
नई दिल्ली । डेस्क: जापान की दिग्गज ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा (Nomura) की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित पूरे एशिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का असर नौकरियों पर साफ दिखने लगा है. शुरुआती आंकड़ों को देखें तो एआई ने नौकरियों को खत्म करने के बजाय ज्यादा नए अवसर पैदा किए हैं. हालांकि, इस सकारात्मक आंकड़े के पीछे एक बड़ा और चिंताजनक बदलाव छिपा है और वह है फ्रेशर्स यानी नए स्नातकों के लिए घटते अवसर.
रिपोर्ट 'बियॉन्ड द हेडलाइंस: एआई हैस एडेड जॉब्स इन एशिया – सो फार' के मुताबिक, एशिया की 69 कंपनियों के विश्लेषण में एआई के कारण लगभग 1.31 लाख नौकरियां पैदा हुईं, जबकि करीब 61,000 नौकरियां समाप्त हुईं. इस लिहाज से भारत, चीन और फिलीपींस जैसे देशों में रोजगार का शुद्ध आंकड़ा फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है.
रोजगार बाजार में 'K-शेप्ड' विभाजन और साइलेंट फायरिंग
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि एआई से जो नई नौकरियां बन रही हैं, वे उन नौकरियों जैसी नहीं हैं जो खत्म हो रही हैं. श्रम बाजार में एक तरह का 'K-शेप्ड' (K-shaped) विभाजन देखा जा रहा है. कंपनियों को अब ऐसे अनुभवी पेशेवरों की ज्यादा जरूरत है, जिनके पास बिजनेस की गहरी समझ, मैनेजमेंट का अनुभव और बेहतर इंटरपर्सनल स्किल्स हैं. इसके विपरीत, शुरुआती स्तर यानी एंट्री-लेवल के कर्मचारियों की मांग में भारी गिरावट आई है.
'इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस' (ICRIER) द्वारा भारत की 651 आईटी कंपनियों पर किए गए सर्वे से भी इसकी पुष्टि होती है. सर्वे के अनुसार, 55% कंपनियों ने एंट्री-लेवल की भर्तियों में कमी की बात स्वीकार की है, जबकि वरिष्ठ पदों पर केवल 14% कंपनियों ने ही भर्ती घटाई है.
कंपनियां अब कर्मचारियों को अचानक बड़े पैमाने पर निकालने के बजाय नई भर्तियां रोक रही हैं. नोमुरा ने इसे 'साइलेंट फायरिंग' (Silent Firing) का नाम दिया है. स्टाफिंग कंपनी एक्सफेनो (Xpheno) के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय आईटी सेक्टर में शुद्ध भर्ती FY22 के 6 लाख से घटकर FY26 में करीब 1.4 लाख पर आ गई है. यह बदलाव मुख्य रूप से कैंपस प्लेसमेंट में कमी और धीमी भर्ती प्रक्रिया के जरिए हुआ है.
किस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा प्रभाव और कहां बन रहे हैं मौके?
एआई के कारण हुई कुल छंटनी में से 58% बैंकिंग व वित्तीय सेवाओं में और 30% प्रौद्योगिकी (टेक्नोलॉजी) क्षेत्र में दर्ज की गई है. बैंकों में डेटा एंट्री, कंप्लायंस, रिकोंसिलिएशन और कस्टमर सर्विस जैसे रूटीन काम अब एआई और चैटबॉट्स संभाल रहे हैं. आईटी में भी क्वालिटी एश्योरेंस टेस्टिंग और शुरुआती कोडिंग जैसे काम प्रभावित हुए हैं. इसके उलट, निर्माण, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और शिक्षा जैसे फिजिकल व हाई-टच सेक्टर्स में स्वचालन (ऑटोमेशन) कठिन होने के कारण असर कम पड़ा है.
दूसरी ओर, एआई से पैदा हुई 90% से अधिक नौकरियां प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक ही सीमित हैं. भारत में डेटा एनोटेशन, लिंग्विस्टिक्स और एआई-आधारित आईटी सेवाओं में नए पद बने हैं. वहीं चीन में प्रोपराइटरी एआई मॉडल विकसित करने के लिए उच्च-कुशल स्नातकों की ज्यादा मांग देखी गई है.
भारत के लिए आगे क्या हैं चुनौतियां?
आईटी-सेवाओं और बिजनेस-प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) का बड़ा केंद्र होने के कारण भारत पर एआई का असर सबसे ज्यादा पड़ सकता है. भारत के पास इंजीनियरिंग प्रतिभाओं का बड़ा पूल है, जो एआई के नए मौकों का फायदा उठा सकता है. लेकिन जैसे-जैसे एआई सामान्य ऑटोमेशन से आगे बढ़कर स्वायत्त यानी 'एजेंटिक एआई' (Agentic AI) की ओर बढ़ रहा है, आने वाले सालों में इसका असर और गहरा हो सकता है.
फिलहाल एआई नौकरियों का 'अपोकैलिप्स' (पूर्ण विनाश) भले न लाया हो, लेकिन भारत के युवा स्नातकों के लिए करियर की पहली सीढ़ी जरूर कठिन बना रहा है.