AI आधारित डिजिटल ट्विन से किडनी रोग इलाज आसान होगा
नई दिल्ली । डेस्क: किडनी की गंभीर बीमारियों के इलाज में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है. भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर किडनी रोग के इलाज के लिए एक नई तकनीक पर काम शुरू किया है, जिसे ‘डिजिटल ट्विन मॉडल’ कहा जा रहा है. इस तकनीक के जरिए मरीज की असली किडनी जैसी ही एक वर्चुअल किडनी तैयार की जाती है, जिस पर इलाज का परीक्षण पहले किया जाएगा.
अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ वर्जीनिया और भारत के आईआईटी दिल्ली व एम्स दिल्ली के डॉक्टर और शोधकर्ता इस मॉडल पर संयुक्त रूप से शोध कर रहे हैं. मरीज के विभिन्न मेडिकल टेस्ट, शारीरिक बनावट और अंगों की कार्यप्रणाली से जुड़े डेटा के आधार पर यह डिजिटल किडनी बनाई जाती है. यह केवल थ्री-डी तस्वीर नहीं, बल्कि असली किडनी की तरह काम करने वाला एक वर्चुअल मॉडल होता है.
डिजिटल ट्विन किडनी मरीज के रक्तचाप, हार्मोन में बदलाव या दवाओं के साइड इफेक्ट का असर पहले ही बता सकती है. डॉक्टर किसी भी दवा, इलाज या सर्जरी को सीधे मरीज पर आजमाने से पहले इस डिजिटल किडनी पर उसका असर देखेंगे. यदि परिणाम सुरक्षित और प्रभावी पाए जाते हैं, तभी असली मरीज पर इलाज किया जाएगा.
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जोखिमभरी प्रक्रियाओं में संभावित जटिलताओं का पहले से अंदाजा लगाया जा सकेगा. साथ ही, क्योंकि हर मरीज के लिए डिजिटल ट्विन अलग होगा, इसलिए यह तकनीक पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट को बढ़ावा देगी और गलत दवाओं के दुष्प्रभाव से मरीजों को बचाने में मदद करेगी.
चिकित्सा जगत में इसे किडनी रोग के इलाज की दिशा में एक बड़ी और सुरक्षित पहल माना जा रहा है, जो भविष्य में लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है.