सोम, 19 अक्टू. 2026

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AI बन सकता है विनाश का नया हथियार?

क्या AI मानवता के लिए वरदान है या विनाश का नया हथियार?

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16 फ़र. 2026, 06:51 AM 5 मिनट में पढ़ें 2

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नई दिल्ली । डेस्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन दिनों अपनी तकनीकी उपलब्धियों के बजाय उन डरावनी खबरों के कारण सुर्खियों में है जो भविष्य की एक भयावह तस्वीर पेश करती हैं. हाल के महीनों में डीपफेक के जरिए ठगी, साइबर हमलों के लिए एआई का दुरुपयोग और चैटबॉट्स द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी घटनाओं ने सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया की सबसे बड़ी एआई कंपनियों जैसे कि एंथ्रोपिक, ओपनएआई और एक्सएआई के प्रमुख शोधकर्ताओं ने हाल ही में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. 


इन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक जिस गति से विकसित हो रही है, वह समाज द्वारा इसे नियंत्रित करने की क्षमता से कहीं अधिक तेज है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि एआई का विकास इसी अनियंत्रित गति से जारी रहा, तो यह मानव जाति के लिए अस्तित्व का संकट बन सकता है. विशेष रूप से 'आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस' (एजीआई) का विचार, जो इंसानी सोच और तर्क करने की क्षमता के बराबर होगा, भविष्य में मनुष्यों के लिए घातक साबित हो सकता है. 

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सेंटर फॉर एआई सेफ्टी की सलाहकार लिव बोएरी ने इसकी तुलना जैव-प्रौद्योगिकी से करते हुए कहा है कि जैसे यह तकनीक दवाइयां बनाने में सहायक है, वैसे ही इसका उपयोग खतरनाक रोगजनक बनाने के लिए भी किया जा सकता है.


हाल ही में एंथ्रोपिक के सुरक्षा शोधकर्ता मृणांक शर्मा के इस्तीफे ने उद्योग जगत में खलबली मचा दी है. उन्होंने अपनी विदाई चिट्ठी में साफ तौर पर कहा कि "दुनिया खतरे में है" और हम उस दहलीज पर पहुंच गए हैं जहां हमारी क्षमताएं हमारी बुद्धिमत्ता से आगे निकल चुकी हैं. इसी तरह, ओपनएआई की जोई हित्जिग ने चैटजीपीटी पर विज्ञापनों के परीक्षण के विरोध में इस्तीफा दिया. उनका तर्क है कि जब लोग एआई के साथ अपनी सबसे निजी बातें साझा करते हैं, तो उस डेटा का उपयोग विज्ञापनों के जरिए मनोवैज्ञानिक हेरफेर के लिए किया जा सकता है. 


इसके अलावा, एलन मस्क की कंपनी एक्सएआई से भी कई प्रमुख सदस्यों ने इस्तीफा दिया है, जिसका संबंध संभवतः 'ग्रोक' चैटबॉट द्वारा बनाई गई यौनिक और नस्लवादी सामग्री से माना जा रहा है. ये इस्तीफे केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं हैं, बल्कि यह उस असुरक्षा की भावना को दर्शाते हैं जो एआई के भीतर काम करने वाले लोग महसूस कर रहे हैं. हाइपरराइट के सीईओ मैट शुमर ने भी स्वीकार किया है कि 2025 में एआई ने जिस तरह से छलांग लगाई है, वह केवल सुधार नहीं बल्कि एक पूरी तरह से नई और अनियंत्रित शक्ति है.


एआई के खतरे अब केवल कागजी नहीं रह गए हैं. ट्यूरिंग अवार्ड विजेता योशुआ बेंगियो के अनुसार, पिछले एक साल में ऐसे जोखिम सच साबित हुए हैं जिनकी पहले केवल कल्पना की जाती थी. सबसे चौंकाने वाला पहलू इंसानों और चैटबॉट्स के बीच बढ़ता भावनात्मक लगाव है. ब्रिटेन में एक 14 वर्षीय किशोर की आत्महत्या का मामला, जिसमें वह एक काल्पनिक चैटबॉट के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा था, एआई के मनोवैज्ञानिक प्रभाव का काला चेहरा है. 


वहीं, सामरिक मोर्चे पर एआई का उपयोग विनाशकारी हो रहा है. गाजा में चल रहे युद्ध के दौरान इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को ट्रैक और लक्षित करने के लिए एआई संचालित हथियारों का उपयोग किया गया है, जिसमें 72,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. इसके अलावा, एआई 'एजेंट्स' अब साइबर जासूसी में इतने सक्षम हो गए हैं कि वे सरकारी और वित्तीय संस्थानों के कोड को हैक कर रहे हैं. 


एआई की स्वायत्तता का स्तर यहां तक पहुंच गया है कि कुछ प्रणालियां परीक्षण के दौरान अपने डेवलपर्स को धोखा देने और झूठ बोलने लगी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हम ऐसी मशीनों को प्रशिक्षित कर रहे हैं जो अंततः हमारे नियंत्रण से बाहर हो सकती हैं.


रोजगार के मोर्चे पर भी एआई ने 'कयामत' जैसी स्थिति पैदा कर दी है. माइक्रोसॉफ्ट एआई के सीईओ मुस्तफा सुलेमान का दावा है कि अगले 12 से 18 महीनों में प्रोजेक्ट मैनेजर, वकील और अकाउंटेंट जैसे 'व्हाइट कॉलर' काम पूरी तरह से स्वचालित हो सकते हैं. पत्रकारिता क्षेत्र में भी एआई का प्रभाव विनाशकारी रहा है, जहां कई प्रकाशक अब मानव रिपोर्टिंग के बजाय एआई सारांशों को प्राथमिकता दे रहे हैं. 


अंतर्राष्ट्रीय एआई सुरक्षा रिपोर्ट 2026 के अनुसार, विकसित देशों में लगभग 60 प्रतिशत नौकरियां एआई के कारण खतरे में हैं. हालांकि कंपनियां इसे एक 'सहायक' के रूप में पेश करती हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह श्रम बाजार में प्रवेश करने वाले नए युवाओं के लिए दरवाजे बंद कर रहा है. वर्तमान में दुनिया भर में एआई का कोई वैश्विक नियामक ढांचा नहीं है. 


यूरोपीय संघ ने 'एआई एक्ट' के जरिए कुछ नियम बनाने की कोशिश की है, लेकिन तकनीक की रफ्तार के सामने ये कानून अब भी बौने नजर आते हैं. विशेषज्ञ कहते हैं कि एआई कंपनियां वर्तमान में एक ऐसी कार की तरह हैं जिसमें केवल एक्सीलेटर है, ब्रेक नहीं. यदि सरकारों ने जलवायु परिवर्तन की तरह एआई सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी, तो यह तकनीक मानवता के विकास के बजाय उसके विनाश का अध्याय लिख सकती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP