अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर बनी सहमति
नई दिल्ली । डेस्क: मध्य पूर्व में पिछले तीन महीनों से जारी भीषण युद्ध अब समाप्त होने की कगार पर है. मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 'एक्स' पर घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर सहमति बन गई है. इस समझौते के तहत सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियानों को 'तत्काल और स्थायी' रूप से रोकने का फैसला किया गया है.
इस शांति समझौते पर आगामी 19 जून को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जाएंगे.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी रविवार को अपने 80वें जन्मदिन के अवसर पर इस समझौते की पुष्टि की. राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान जारी कर कहा कि ईरान के साथ डील पूरी हो चुकी है. इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमनध्य को तुरंत खोलने और ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने के निर्देश दे दिए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति फिर से सुचारू रूप से शुरू हो सके.
हालांकि, ईरान की ओर से अभी तक इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इससे पहले, बेरूत में इजराइल द्वारा हिजबुल्लाह पर किए गए हवाई हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी, जिससे इस समझौते पर संशय के बादल मंडराने लगे थे.
रविवार सुबह खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस हवाई हमले के लिए इजराइल पर नाराजगी जताई थी, लेकिन बाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के प्रयासों से कूटनीतिक समाधान निकाल लिया गया. शहबाज शरीफ ने इस मध्यस्थता में सहयोग के लिए कतर, सऊदी अरब और तुर्की के नेताओं का भी आभार व्यक्त किया है.
ट्रंप ने की पुष्ठि
संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक संघर्ष विराम समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच जारी सैन्य गतिरोध तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएगा. इस समझौते की सबसे बड़ी उपलब्धि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरू मध्य को बिना किसी शुल्क के जहाजों की आवाजाही के लिए फिर से खोलना है. यह मार्ग पिछले साल 28 दिसंबर को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से बड़े पैमाने पर बंद था. इस समझौते की पुष्टि ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गारीबाबादी ने भी की है.
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि ईरान के साथ यह समझौता अब पूरा हो चुका है. उन्होंने अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का निर्देश देते हुए दुनिया भर के जहाजों से अपना परिचालन शुरू करने और तेल के प्रवाह को सामान्य बनाने का आह्वान किया. ट्रम्प ने उम्मीद जताई कि इस बड़े फैसले से पूरे क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का एक नया दौर शुरू होगा.
हालांकि, न्यू यॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका 20 प्रतिशत क्षेत्रीय राजस्व के बदले मध्य पूर्व का संरक्षक बन सकता है.
विश्व नेताओं ने किया स्वागत
इस बीच, कतर के विदेश मंत्रालय ने समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश आगामी तकनीकी वार्ताओं में सहयोग करने के लिए तैयार है और होर्मुज जलडमरू मध्य के खुलने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आएगी.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इस कूटनीतिक सफलता की सराहना करते हुए सभी पक्षों से इसे पूरी तरह लागू करने की अपील की है. मैक्रों ने लेबनान की संप्रभुता और स्थिरता को बनाए रखने के लिए फ्रांसीसी समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई.
अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते को मध्य पूर्व के लिए एक 'नए युग' की शुरुआत बताया है. उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इस ऐतिहासिक कदम के बाद ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा.
वेंस ने उम्मीद जताई कि इस समझौते से वैश्विक स्तर पर ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में भारी कमी आएगी, जिससे अमेरिकी जनता सहित पूरी दुनिया को राहत मिलेगी. वह अगले सप्ताह स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह में भी शामिल होंगे. यह समझौता क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बाद एक बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है.