आगरा में यमुना के उफान से ताजमहल पर खतरा
आगरा । डेस्क: आगरा में यमुना नदी का पानी ताजमहल तक पहुंच गया है. इससे दुनिया के इस सांतवे आश्चर्य पर खतरा मंडरा रहा है. हालांकि, ऐसा कई साल पहले भी हुआ था. यह भी आगरा वासियों द्वारा रोज-रोज दुनिया के महान आश्चर्य ताजमहल को देखने वालों के लिये एक आश्चर्य की बात है. बहरहाल, प्रशासन सतर्क हो गया है.
मथुरा जिले में यमुना नदी का जलस्तर लगातार खतरे की ओर बढ़ रहा है. गोकुल बैराज के 22 गेट खोलकर 82 हजार क्यूसेक पानी आगरा की ओर छोड़ा जा रहा है. विश्राम घाट पूरी तरह पानी में डूब चुका है, जहां पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद वासुदेव जी उन्हें लेकर गए थे. प्रशासन ने मथुरा में भी हाई अलर्ट जारी किया है और लोगों को नदी के किनारे जाने से मना किया गया है.
आगरा में यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे विश्व प्रसिद्ध ताजमहल पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. नदी का पानी ताजमहल की पीछे की दीवारों तक पहुंच गया है, जो पिछले 45 वर्षों में पहली बार देखा गया है. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अपने कैंप को पीछे हटा लिया है और प्रभावित क्षेत्र को अवरुद्ध कर दिया गया है. पुरातत्व विभाग ने भरोसा दिलाया है कि ताजमहल का ऊंचा चबूतरा इसे बाढ़ से सुरक्षित रखेगा, लेकिन स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.
1978 की बाढ़ की यादें ताजा
स्थानीय निवासियों को 1978 की भयंकर बाढ़ की यादें सता रही हैं, जब यमुना का जलस्तर 508 फीट तक पहुंच गया था और ताजमहल के मुख्य द्वार तक पानी आ गया था. उस दौरान कई मंदिर और घाट जलमग्न हो गए थे. वर्तमान में जलस्तर 495.5 फीट के करीब है और संभावना जताई जा रही है कि यह और बढ़ सकता है. हाई फ्लड लेवल 508 फीट होने के कारण प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है.
यमुना के उफान से आगरा और आसपास के क्षेत्रों में दहशत का माहौल है. प्रशासन ने 40 से अधिक गांवों में अलर्ट जारी किया है और लोगों को नदी के किनारे न जाने की चेतावनी दी है. यमुना का पानी खेतों में घुस रहा है और यमुना किनारा रोड पर जलभराव के कारण यातायात बाधित हो गया है. बटेश्वर तीर्थ स्थल पर घाट की सीढ़ियां डूब चुकी हैं और वहां स्नान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
दिल्ली और हरियाणा में हुई भारी बारिश के बाद हथिनीकुंड बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिसके कारण यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. प्रशासन और पुलिस की टीमें स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी हैं, लेकिन शहर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है. स्थानीय लोग चिंतित हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति 1978 की बाढ़ के बाद पहली बार देखने को मिल रही है.