अग्निवीर हनी-ट्रैप रडार पर, सोशल मीडिया की जांच शुरू
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में तैनात कई अग्निवीरों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की गहनता से जांच कर रही हैं. केंद्रीय गृह मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, विदेशी खुफिया एजेंसियों, विशेषकर पाकिस्तान की आईएसआई, द्वारा चलाए जा रहे संदिग्ध हनी-ट्रैप नेटवर्क से कुछ अग्निवीरों की बातचीत के सबूत मिले हैं.
अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस ऑनलाइन बातचीत के दौरान कोई गोपनीय या सामरिक जानकारी साझा की गई है या नहीं.
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए इन युवा सैनिकों की सोशल मीडिया पर सक्रियता अधिक देखी गई है, जिसके चलते कई जवान एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं. पाकिस्तानी एजेंसियां अक्सर महिला ऑपरेटर्स के जरिए फर्जी प्रोफाइल बनाकर भारतीय सेना के जवानों को आकर्षित करती हैं और फिर अश्लील बातचीत या तस्वीरें हासिल कर उन्हें ब्लैकमेल करती हैं.
हालांकि भारतीय सेना ने पिछले साल सोशल मीडिया के उपयोग के नियमों में ढील देते हुए जवानों को इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और एक्स (X) का केवल 'पैसिव यूज' (यानी केवल देखने और जानकारी प्राप्त करने) की अनुमति दी थी.
सेना के सख्त निर्देशों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की पोस्ट, कमेंट, शेयर, रिएक्शन या मैसेज भेजना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल केवल परिचित लोगों से ही सामान्य बातचीत के लिए करने का नियम है.
सैन्य मामलों से जुड़े रक्षा कर्मियों को हनी-ट्रैप का शिकार बनाकर जासूसी कराने के मामले पहले भी आ चुके हैं.
2018 में ब्रह्मोस एयरोस्पेस के इंजीनियर निशान्त अग्रवाल और वायु सेना के ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह को भी इसी तरह ऑनलाइन जाल में फंसाकर खुफिया जानकारी निकालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. अब अग्निवीरों के बीच बढ़ते इस खतरे को देखते हुए रक्षा मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर निगरानी बढ़ा दी है.