हॉर्मुज के बाद अब लाल सागर में हूतियों के हमले का मंडराया खतरा
नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया इस समय एक ऐसे गंभीर आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ी है, जहां दो प्रमुख समुद्री व्यापारिक मार्ग एक साथ बंद होने की कगार पर हैं. वैश्विक बाजार अभी ओमान की खाड़ी में 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' में मचे व्यवधान और उससे आसमान छूती तेल की कीमतों से जूझ ही रहे थे कि अब एक नया और अधिक खतरनाक जोखिम सामने आ गया है.
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू करने की संभावना ने दुनिया भर के नीति निर्माताओं की नींद उड़ा दी है. यदि ऐसा होता है, तो विश्व इतिहास में पहली बार दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट्स पर एक साथ संकट उत्पन्न होगा, जिसका आर्थिक प्रभाव वर्तमान अनुमानों से कहीं अधिक विनाशकारी हो सकता है.
वर्तमान में तेल बाजारों में एक अजीब सी खामोशी और अनिश्चितता का माहौल है. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को बिना हॉर्मुज को पूरी तरह खोले समाप्त करने की खबरों ने तात्कालिक घबराहट को कुछ कम किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि हॉर्मुज के रास्ते ऊर्जा का प्रवाह अभी भी गंभीर रूप से बाधित है.
विश्लेषकों का मानना है कि जब तक इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बहाल नहीं होता, तब तक कीमतों में किसी बड़े सुधार की उम्मीद बेमानी है. इसी बीच, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है, जिसमें कहा गया है कि ईरान अब हूतियों को लाल सागर में नए सिरे से हमले करने के लिए उकसा रहा है ताकि खाड़ी क्षेत्र के बाहर भी अपना दबदबा बनाया जा सके.
हूतियों ने शनिवार को इजरायल पर मिसाइलें दागकर सीधे तौर पर संघर्ष में शामिल होने के संकेत दे दिए हैं और 'बाब अल-मंडेब' जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है.
यह खतरा केवल सैद्धांतिक नहीं है. साल 2023 से 2025 के बीच हूतियों ने 100 से अधिक जहाजों पर हमले किए थे, जिससे दुनिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियों को अपने जहाज अफ्रीका के चक्कर लगाकर भेजने पड़े थे. उस समय ट्रांजिट समय में दो सप्ताह की वृद्धि और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल देखा गया था. आज स्थिति इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि 2023 में वैश्विक तेल भंडार पर्याप्त थे, लेकिन आज हॉर्मुज में जारी संकट के कारण सिस्टम पहले से ही दबाव में है.
हालांकि, हूतियों के भीतर हमलों की तीव्रता को लेकर मतभेद और यमन की जर्जर आर्थिक स्थिति उन्हें फिलहाल बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई से रोक रही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और इजरायल के बीच युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, लाल सागर में हमलों की संभावना उतनी ही बढ़ती जाएगी.
भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है. भारत का यूरोप के साथ होने वाला व्यापार मुख्य रूप से लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते होता है. यदि बाब अल-मंडेब बाधित होता है, तो भारतीय निर्यातकों और आयातकों को मजबूरन अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' का लंबा रास्ता चुनना होगा, जिससे माल ढुलाई की लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगे.
ऊर्जा मोर्चे पर, भारत कच्चे तेल के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है. हॉर्मुज के पहले से ही बाधित होने के कारण लाल सागर का मार्ग वैकल्पिक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण था, लेकिन वहां भी संकट आने से कच्चे तेल की लैंडेड लागत बढ़ जाएगी.
इसका सीधा असर भारत में मुद्रास्फीति (महंगाई) पर पड़ेगा, चालू खाता घाटा बढ़ेगा और गिरते रुपए पर दबाव और अधिक बढ़ जाएगा. रिफाइनिंग, विमानन और लॉजिस्टिक जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर इस झटके की चपेट में आएंगे. अंततः, यदि हॉर्मुज और लाल सागर दोनों एक साथ ठप होते हैं, तो यह न केवल तेल की कीमतों को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाएगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक विकास दर को भी पटरी से उतार देगा.