अच्युतानंद परिवार का पद्म विभूषण लेने से इनकार
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के नक्शेकदम पर चलते हुए अब केरल के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर वामपंथी नेता वी.एस. अच्युतानंद के परिवार ने भी केंद्र सरकार द्वारा घोषित 'पद्म विभूषण' सम्मान को स्वीकार करने से मना कर दिया है. माकपा के इन दोनों दिग्गज नेताओं ने अपने जीवनपर्यंत पार्टी के अनुशासन और विचारधारा को सर्वोपरि रखा, जिसे उनके परिवारों ने अब भी कायम रखा है.
गौरतलब है कि बुद्धदेव भट्टाचार्य ने जीवित रहते हुए ही 'पद्म भूषण' को तुरंत ठुकरा दिया था, जबकि अच्युतानंद के मामले में यह घोषणा मरणोत्तर की गई है.
हालांकि, अच्युतानंद के पुत्र वी. अरुण कुमार ने इस निर्णय की जानकारी देने में कुछ दिनों का समय लिया. सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके पिता आजीवन कम्युनिस्ट पार्टी के सिद्धांतों पर चले और उन्हीं आदर्शों का सम्मान करते हुए परिवार ने यह पुरस्कार न लेने का फैसला किया है.
सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय में देरी के पीछे केरल माकपा और परिवार के बीच चल रही लंबी चर्चा मुख्य वजह रही. पार्टी का तर्क था कि चुनाव के मुहाने पर खड़े राज्य में यदि परिवार यह पुरस्कार स्वीकार करता है, तो पार्टी को वैचारिक स्तर पर असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता है.
आखिरकार, पार्टी नेतृत्व परिवार को अपनी नीतिगत स्थिति समझाने में सफल रहा और अच्युतानंद के परिवार ने भी बुद्धदेव भट्टाचार्य की तरह ही 'राजकीय सम्मान' को अस्वीकार करने की परंपरा को आगे बढ़ाया.