मलेरिया से बच्चे की मौत, जांच में मिले 119 पॉजिटिव
जगदलपुर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में मलेरिया से एक बच्चे की मौत की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है. इसके बाद से जांच तेज कर दी गई है.
नानगुर के आसपास के गांवों में 20 से अधिक ग्रामीण मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं. वहीं जिले भर में 119 मलेरिया पॉजिटिव मरीजों के मिलने की पुष्टि हुई है, जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है.
दरअसल, जिले के नानगुर उप विकासखंड के नागलसर गांव में रहने वाला अमित नाग मलेरिया से पीड़ित था. बच्चे को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाने के चलते उसने दम तोड़ दिया.
नानगुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. जेएल दरियो ने बताया कि नागलसर निवासी 6 साल का अमित नाग चिकन पॉक्स और मलेरिया से पीड़ित था. बच्चे के परिजन चिकन पॉक्स को देखते हुए गांव के सिरहा से झाड़-फूंक करा रहे थे.
मितानिन ने दी थी दवा
इस बीच मितानिन द्वारा मलेरिया किट से टेस्ट करने पर बच्चा मलेरिया पॉजिटिव पाया गया. मितानिन ने उसे तीन दिनों तक दवा भी दिया था.
लेकिन बच्चे की तबीयत ज्यादा बिगड़ती चली गई, जिसके बाद उसे डिमरापाल अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज शुरू होने से पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया.
इसके बाद बच्चे के परिजनों ने पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया.
वर्तमान में नानगुर के आसपास नागलसर, कोलेंग और उससे लगे गांवों में मलेरिया जांच के दौरान 20 से ज्यादा मरीज मलेरिया पॉजिटिव पाए गए हैं.
जिनमें से कुछ मरीजों को नानगुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है जिनका ईलाज जारी है.
सिरहा से झाड़-फूंक
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाख का कहना है कि जांच में पाया गया है कि बच्चे की मलेरिया से मौत हुई है. ग्रामीण अंचलों में जागरूकता के अभाव में खासकर बारिश के मौसम में तबीयत बिगड़ने पर लोग सिरहा से झाड़-फूंक करवाते हैं. अंधविश्वास के चलते और लापरवाही बरतने से कई लोगों की जान चली जाती है.
उन्होंने बताया कि पूरे जिले भर में मलेरिया मुक्त अभियान के तहत मलेरिया किट से जांच किया जा रहा है. पिछले कुछ महीनों में अब तक 119 मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिलने की पुष्टि हुई है. जिनमें सबसे ज्यादा दरभा ब्लॉक और जगदलपुर ब्लॉक के ग्रामीण अंचल शामिल हैं.
मलेरिया किट की कमी
स्वास्थ्य अधिकारी का कहना है कि मलेरिया से निपटने के लिए पर्याप्त डोज शासन ने उपलब्ध कराई है, लेकिन मलेरिया किट की कमी बनी हुई है. शासन को पत्र लिखा गया है और मलेरिया किट की मांग की गई है. फिलहाल जिले में स्थिति काबू में है और लगातार ग्रामीणों को मेडिकल टीम द्वारा मलेरिया को लेकर जागरूक भी किया जा रहा है.