कांगो और युगांडा में इबोला से 88 मौत: WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी
जिनेवा । डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे इबोला के प्रकोप को देखते हुए रविवार को इसे 'अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल' (PHEIC) यानी ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है. अफ्रीका के इस क्षेत्र में अब तक इबोला के 300 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जबकि 88 लोगों की मौत हो चुकी है.
WHO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि हालांकि यह प्रकोप कोविड-19 की तरह 'महामारी आपातकाल' की श्रेणियों में नहीं आता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद करने की आवश्यकता नहीं है.
After having consulted the #DRC and #Uganda where the #Ebola disease caused by Bundibugyo virus is known to be currently occurring, I determine that the epidemic constitutes a public health emergency of international concern (PHEIC), as defined in the provisions of IHR.
— Tedros Adhanom Ghebreyesus (@DrTedros) May 17, 2026
My full… pic.twitter.com/zhYVEyxSI8
स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, यह मौजूदा प्रकोप इबोला के एक दुर्लभ वेरिएंट 'बुंडिबुग्यो वायरस' (Bundibugyo virus) के कारण फैला है. चिंता की बात यह है कि इस विशिष्ट वेरिएंट के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत इलाज (Therapeutics) या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है.
इतिहास में यह केवल तीसरी बार है जब बुंडिबुग्यो वायरस का पता चला है. इससे पहले साल 2007-2008 में युगांडा और साल 2012 में कांगो में इस वायरस का असर देखा गया था.
WHO के अनुसार, संक्रमण के दो मामलों को छोड़कर बाकी सभी मामले कांगो में दर्ज किए गए हैं. युगांडा में जो दो मामले सामने आए हैं, वे दोनों मरीज कांगो से यात्रा कर युगांडा की राजधानी कंपाला पहुंचे थे, जिनमें से एक मरीज की मौत अस्पताल में हो चुकी है.
कांगो के पूर्वी प्रांत इतूरी से शुरू हुआ यह संक्रमण अब सुरक्षा एजेंसियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. WHO प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि इस समय संक्रमित लोगों की वास्तविक संख्या और इसके भौगोलिक फैलाव को लेकर काफी अनिश्चितताएं हैं, साथ ही मामलों के बीच महामारी विज्ञान संबंधी कड़ियों (Epidemiological links) की समझ भी अभी सीमित है.
WHO द्वारा आपातकाल घोषित करने का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर डोनर एजेंसियों और देशों को आर्थिक व चिकित्सीय मदद के लिए सक्रिय करना है.
हालांकि, विशेषज्ञ पहले के अनुभवों को देखते हुए वैश्विक प्रतिक्रिया पर सवाल भी उठा रहे हैं. इससे पहले साल 2024 में जब WHO ने मंकीपॉक्स (Mpox) को लेकर वैश्विक आपातकाल घोषित किया था, तब प्रभावित अफ्रीकी देशों तक डायग्नोस्टिक टेस्ट, दवाएं और टीके तेजी से पहुंचाने में वैश्विक स्तर पर कोई खास कामयाबी नहीं मिली थी.
बता दें कि इबोला वायरस रोग (EVD), जिसे पहले इबोला रक्तस्रावी बुखार के नाम से जाना जाता था, मनुष्यों और अन्य प्राइमेट्स (जैसे बंदर, गोरिल्ला और चिंपैंजी) में होने वाली एक अत्यंत दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर और अक्सर घातक बीमारी है. यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित जंगली जानवरों, जैसे कि फ्रूट बैट (चमगादड़), बंदरों या एंटीलोप के सीधे संपर्क में आने से इंसानों में फैलता है.
मनुष्यों के बीच यह वायरस हवा के माध्यम से नहीं फैलता, बल्कि संक्रमित व्यक्ति के रक्त, लार, उल्टी, पसीने, वीर्य या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से, या फिर इन तरल पदार्थों से दूषित सतहों और कपड़ों को छूने से फैलता है.
इबोला वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद इसके लक्षण दिखने में 2 से 21 दिन का समय लग सकता है. इसके शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं. जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, संक्रमित व्यक्ति को उल्टी, दस्त, त्वचा पर चकत्ते (रैश), और किडनी व लिवर की कार्यप्रणाली में खराश जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
कुछ मामलों में, मरीजों के शरीर के अंदर और बाहर (जैसे मसूड़ों, नाक या मल के रास्ते) अत्यधिक रक्तस्राव भी होने लगता है.
इबोला के कई वेरिएंट्स हैं, जिनमें से सूडान और ज़ायरे वेरिएंट्स के लिए कुछ टीके और उपचार विकसित किए जा चुके हैं, लेकिन बुंडिबुग्यो जैसे कुछ दुर्लभ वेरिएंट्स के लिए अभी तक कोई स्वीकृत टीका या विशिष्ट दवा उपलब्ध नहीं है, जिससे इसके इलाज में केवल सहायक देखभाल (जैसे ओआरएस, ग्लूकोज और लक्षणों को कम करने वाली दवाएं) ही दी जाती है.
इस जानलेवा बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका संक्रमित मरीजों की पहचान कर उन्हें तुरंत अलग रखना, स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) का उपयोग करना और स्वच्छता के कड़े नियमों का पालन करना है.