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गुजरात के गिर जंगल में 4 शेर के शावकों की मौत

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28 मई 2026, 07:12 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

शेर के बच्चे
शेर के बच्चे

गांधीनगर । डेस्क: गुजरात के गिर वन क्षेत्र में एक संदिग्ध संक्रमण के कारण चार शेर के शावकों की मौत हो गई है, जिससे वन विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है. इस घटना के बाद एहतियात के तौर पर 17 वयस्क शेरों को आइसोलेट कर उनकी विशेष निगरानी की जा रही है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए.


प्रधान सचिव (वन और पर्यावरण) विनोद राव ने बैठक में बताया कि गिर गढड़ा और बाबरिया के 10 किलोमीटर के दायरे में गहन निगरानी अभियान चलाया जा रहा है. राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी अन्य जानवर में बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं. इसके अलावा अमरेली और भावनगर जिलों के महुली क्षेत्र में भी शेरों की थर्मल और जमीनी ट्रैकिंग की जा रही है.


वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, शुरुआती जांच में दो शावकों की मौत 'बबेसिया' (Babesia) वायरस संक्रमण के कारण होने की आशंका है, जो कि टिक (किलनी) के काटने से फैलने वाली एक बीमारी है. 


हालांकि, उन्होंने गिर में किसी भी बड़े महामारी के खतरे से इनकार किया है. गर्मियों की शुरुआत में होने वाली इस मौसमी बीमारी से निपटने के लिए गिर क्षेत्र के 350 से अधिक शेरों का 'डी-टिकिंग' (किलनी हटाने का अभियान) और अन्य स्वास्थ्य उपचार शुरू कर दिया गया है. इस पूरे ऑपरेशन में जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद ली जा रही है.


गौरतलब है कि गिर का जंगल एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक निवास स्थान है और साल 2025 की जनगणना के अनुसार यहां कुल 891 एशियाई शेर मौजूद हैं. इससे पहले साल 2018 में भी कैनाइन डिस्टेंपर वायरस और प्रोटोजोआ इंफेक्शन की वजह से एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हो गई थी, जिसे देखते हुए इस बार प्रशासन बेहद सतर्कता बरत रहा है.File Photo.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP