185 दवाइयां टेस्ट में फेल: मरीज क्या खा रहे हैं?
नई दिल्ली । डेस्क: भारत के औषधि नियामक, CDSCO ने जून माह की मासिक गुणवत्ता समीक्षा में 185 दवाइयों के नमूनों को 'गुणवत्ता में अयोग्य' के रूप में चिह्नित किया है. जबकि चार अन्य दवाइयों को 'नकली' घोषित किया गया है. इनमें से 55 नमूनों की पहचान केंद्रीय प्रयोगशालाओं द्वारा की गई, जबकि शेष 130 नमूनों को राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने अयोग्य पाया.
CDSCO ने चार नकली दवाइयों की भी पहचान की, जिनमें बिहार से प्राप्त सेफिक्सिम टैबलेट, दिल्ली से हेपारिन सोडियम और बेंजाइल निकोटिनेट मलहम, साथ ही तेलंगाना से एकत्रित रोसुवास्टेटिन और फेनोफाइब्रेट टैबलेट शामिल हैं.
केंद्रीय प्रयोगशालाओं में अयोग्य पाए गए 55 नमूनों में टैम-ब्रान फार्मास्यूटिकल्स द्वारा निर्मित डेक्सट्रोज इंजेक्शन, ऐपल फॉर्मूलेशंस द्वारा निर्मित एज़िथ्रोमाइसिन टैबलेट, डी.जे. लैबोरेटरीज द्वारा पैरासिटामॉल इंट्रावेनस इन्फ्यूजन, और हिलर्स लैब द्वारा टेल्मिसार्टन टैबलेट सहित 51 अन्य नमूने शामिल हैं.
वहीं, राज्य प्रयोगशालाओं द्वारा चिह्नित 130 नमूनों में पैरासिटामॉल, पैंटोप्राजोल, कैल्शियम, विटामिन डी3 टैबलेट जैसी कई सामान्य दवाइयां शामिल हैं.
स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि दवाइयों को 'गुणवत्ता में अयोग्य' घोषित करने से बाजार में उपलब्ध अन्य दवाइयों के बारे में कोई चिंता की बात नहीं है. CDSCO और राज्य औषधि नियामक नियमित रूप से मासिक समीक्षा के आधार पर ऐसी दवाइयों को चिह्नित करते हैं ताकि उन्हें बाजार से हटाया जा सके और गुणवत्ता मानकों को लागू किया जाये.
इससे पहले भी, केंद्रीय और राज्य सरकारों के संयुक्त परीक्षण में 198 दवाइयाँ गुणवत्ता परीक्षा में असफल रही थीं.
अप्रैल में देश भर से एकत्रित नमूनों में सर्जरी के बाद उपयोग होने वाले इंजेक्शन, तंत्रिका रोगों की दवाइयां, एंटीबायोटिक्स, मधुमेह के इंजेक्शन, और टीबी की दवाइयां शामिल थीं. रिपोर्ट के अनुसार, अयोग्य दवाइयों में 55 हिमाचल प्रदेश, 48 उत्तराखंड, 26 गुजरात, 18 मध्य प्रदेश, और 10 तमिलनाडु की कंपनियों की थीं.