इज़राइल-लेबनान के बीच 10 दिनों का संघर्षविराम- ट्रंप का दावा
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी घोषणा करते हुए बताया है कि इज़राइल और लेबनान 10 दिनों के संघर्षविराम के लिए सहमत हो गए हैं. यह युद्धविराम अमेरिकी समयानुसार गुरुवार शाम 5 बजे (21:00 GMT) से प्रभावी होगा.
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्होंने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन से विस्तार से बात की है. ट्रंप ने लिखा कि दोनों नेता अपने देशों के बीच शांति स्थापित करने के उद्देश्य से इस 10 दिवसीय युद्धविराम को औपचारिक रूप से शुरू करने पर राजी हो गए हैं.
लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि युद्ध के पहले दिन से ही लेबनान की यह केंद्रीय मांग थी, जिसे वाशिंगटन में हुई हालिया बैठकों के बाद हासिल किया गया है.
यह संघर्ष उस समय शुरू हुआ था जब 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने ईरान पर अमेरिकी-इज़राइली हमले के जवाब में इज़राइल पर रॉकेट दागे थे. ज्ञात हो कि 28 फरवरी को ईरानी सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की एक इज़राइली हमले में मौत हो गई थी, जिसके बाद क्षेत्रीय अस्थिरता चरम पर पहुँच गई थी.
इज़राइल की जवाबी सैन्य कार्रवाई में लेबनान में अब तक 2,100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं.
ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही दोनों देशों के शीर्ष नेताओं को सीधी बातचीत के लिए आमंत्रित करेंगे. इस कूटनीतिक सफलता के लिए ट्रंप ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन को एक स्थायी समाधान की दिशा में काम करने का निर्देश दिया है.
मंगलवार को वाशिंगटन में दशकों बाद पहली बार दोनों देशों के दूतों के बीच सीधी कूटनीतिक बातचीत हुई थी, जिसकी मेजबानी मार्को रुबियो ने की थी.
हालांकि, लेबनानी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू से सीधे फोन पर बात करने से इनकार कर दिया था, लेकिन युद्धविराम पर सहमति को एक बड़ी प्रगति के रूप में देखा जा रहा है.
दूसरी ओर, ईरान ने भी अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से पहले लेबनान में युद्धविराम को अपनी अनिवार्य शर्त बताया था.
हालांकि, हिजबुल्लाह ने फिलहाल इस समझौते से खुद को अलग रखा है और राजनयिक प्रक्रिया को खारिज कर दिया है. अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 10 दिनों का विराम एक स्थायी शांति समझौते में बदल पाएगा, जिससे विस्थापित हुए लाखों लेबनानी नागरिक सुरक्षित अपने घरों को लौट सकें.