बंगाल में जारी 1.69 करोड़ जाति प्रमाणपत्रों की होगी जांच
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल सरकार ने साल 2011 के बाद से राज्य में जारी किए गए सभी 1.69 करोड़ अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रमाणपत्रों के पुनर्संस्थापन (री-वेरिफिकेशन) के आदेश दिए हैं. पिछले कुछ वर्षों में इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता और सत्यता पर विभिन्न हलकों से सवाल उठाए जाने और शिकायतें मिलने के बाद यह बड़ा कदम उठाया गया है.
पिछड़ा वर्ग कल्याण (BCW) विभाग के सचिव द्वारा जिला मजिस्ट्रेटों को जारी किए गए आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि उप-विभागीय अधिकारी (SDO), जो प्रमाणपत्र जारी करने वाले प्राधिकारी हैं, 2011 से अब तक जारी किए गए सभी जाति प्रमाणपत्रों की बारीकी से दोबारा जांच करें.
इसके साथ ही, हाल ही में संपन्न मतदाता सूची पुनरीक्षण अभ्यास के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उनके और उनके आश्रितों के जाति प्रमाणपत्रों की भी जांच की जाएगी और नियमों के तहत उन्हें रद्द किया जा सकता है.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई शिकायतें आई थीं कि तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान, विशेषकर 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले, बिना उचित पृष्ठभूमि जांच के अपात्र लोगों को भी जाति प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए थे.
रिकॉर्ड बताते हैं कि सरकार के 'द्वारे सरकार' (Duare Sarkar) कार्यक्रम के दौरान प्राप्त आवेदनों के आधार पर लगभग 47.8 लाख प्रमाणपत्र (32.51 लाख SC, 6.65 लाख ST और 8.64 लाख OBC) जल्दबाजी में जारी किए गए थे, जिससे विस्तृत जांच नहीं हो सकी थी.
इस लापरवाही के कारण वास्तविक SC, ST और OBC समुदाय के लोगों में यह चिंता पैदा हो गई थी कि अपात्र लोगों के शामिल होने से वे सरकारी नौकरियों और अन्य कल्याणकारी योजनाओं में आरक्षण के लाभ से वंचित हो जाएंगे.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस मुद्दे का असर हालिया चुनावों में भी देखने को मिला था. अब राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लापरवाही बरतने वाले जारीकर्ता अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी.