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देश में 15-29 वर्ष के 1 Cr युवा बेरोजगार- संसद में जवाब

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03 दिस. 2025, 04:25 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

बेरोजगार
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नई दिल्ली । डेस्क: लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने देशव्यापी बेरोजगारी दर पर केंद्र सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी. उन्होंने ग्रामीण-शहरी, महिला-पुरुष, युवा वर्ग और राज्यवार आंकड़ों की मांग की, साथ ही अगर ऐसे आंकड़े उपलब्ध न हों तो उनकी अनुपलब्धता का कारण बताने को कहा. श्रम एवं रोजगार मंत्री शोभा करंदलाजे ने लिखित जवाब में न केवल आंकड़े पेश किए, बल्कि गत पांच वर्षों की वार्षिक श्रम शक्ति सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आधार पर स्थिति स्पष्ट की. 


आंकड़ों से पता चलता है कि कुल बेरोजगारी दर में कमी आई है, लेकिन युवाओं के मामले में स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है. अनुमानित रूप से, 15-29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 1 करोड़ से अधिक युवा बेरोजगार हैं, जो समग्र आबादी के 10.2% के बराबर है.


अभिषेक बनर्जी के सवालों में शामिल था कि पिछले कुछ वर्षों में देश में समग्र बेरोजगारी दर में क्या बदलाव आया? विशेष रूप से महिलाओं और युवकों में बेरोजगारी की दर उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है या नहीं? अगर हां, तो इसके पीछे संभावित कारण क्या हैं? साथ ही, केंद्र ने महिलाओं और युवकों के लिए रोजगार सृजन के लिए क्या प्रयास किए और कौशल विकास के क्षेत्र में कितने लोग लाभान्वित हुए? 


मंत्री ने जवाब में बताया कि 2019-20 में 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की बेरोजगारी दर 4.8% थी, जो 2020-21 में घटकर 4.2%, 2021-22 में 4.1%, 2022-23 में 3.2% और 2023-24 में 3.2% रह गई. इस तरह, पांच वर्षों में बेरोजगारी दर में लगभग 1.6% की कमी दर्ज की गई.


हालांकि, युवा वर्ग (15-29 वर्ष) की स्थिति उत्साहजनक नहीं है. 2019-20 में उनकी बेरोजगारी दर 15% थी, जो 2020-21 में 12.9%, 2021-22 में 12.4%, 2022-23 में 10% और 2023-24 में 10.2% पर स्थिर हो गई.


ग्रामीण-शहरी और लिंग आधारित आंकड़े भी जारी किए गए, जो दर्शाते हैं कि रोजगार के मामले में महिलाएं पुरुषों से पीछे हैं. 2019-20 में ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुषों की बेरोजगारी 4.5% और महिलाओं की 2.6% थी, जो 2023-24 में क्रमशः 2.7% और 2.1% हो गई. 


शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 2019-20 में पुरुषों के लिए 6.4% और महिलाओं के लिए 8.9% था, जो 2023-24 में घटकर 4.4% और 7.1% रह गया. इससे स्पष्ट है कि शहरी महिलाओं में बेरोजगारी ग्रामीण महिलाओं से अधिक बनी हुई है.


केंद्र सरकार ने दावा किया है कि बेरोजगारी कम करने के लिए वह निष्क्रिय नहीं है. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), स्टार्टअप इंडिया, दीनदयाल अंत्योदय योजना जैसे कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. 


विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र की छात्राओं के लिए विशेष छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है. उत्पादन क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए 'रोजगार लिंक्ड इंसेंटिव' (ईएलआई) योजना शुरू की गई है. इन प्रयासों से लाखों लोगों को लाभ पहुंचा है, लेकिन युवाओं और महिलाओं के लिए और अधिक लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता बनी हुई है. आंकड़ों से जाहिर होता है कि आर्थिक सुधार के बावजूद, कौशल अंतर और क्षेत्रीय असमानताएं बेरोजगारी की जड़ बनी हुई हैं. (Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP