जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल जारी
नई दिल्ली। डेस्क: प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख को विशेष स्वायत्तता देने की मांग और देश में हाल ही में हुए राष्ट्रीय परीक्षा घोटालों के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बार फिर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है. प्रदर्शन के बीच डॉक्टरों ने चिंता जताई है कि वांगचुक का ब्लड शुगर लेवल तेजी से गिरकर 66 पर पहुंच गया है, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहद नाजुक स्थिति में है.
जंतर-मंतर पर पिछले एक सप्ताह से सैकड़ों छात्र राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार और पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इस छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस दिशा में पहला सकारात्मक कदम हो सकता है, लेकिन वास्तविक जवाबदेही सरकार के शीर्ष स्तर पर तय होनी चाहिए.
उन्होंने संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले देश के परीक्षा ढांचे में व्यापक विधायी सुधार करने की पुरजोर मांग की है.
वांगचुक का यह आंदोलन दोहरे संकट पर आधारित है. पहला संकट लद्दाख के पारिस्थितिक भविष्य को लेकर सरकार द्वारा किए गए वादों से मुकर जाना है, और दूसरा संकट देश की शिक्षा प्रणाली का पतन है.
हाल ही में पेपर लीक और अकादमिक दबाव के कारण हुई लगभग 20 छात्रों की आत्महत्याओं का जिक्र करते हुए वांगचुक ने भावुक होकर कहा, "जब परीक्षा प्रणाली ही युवाओं को निराश करने लगे, तब आवाज उठाना बेहद जरूरी हो जाता है. अगर हम साल 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनाना चाहते हैं, तो हमें शिक्षा में बड़ा निवेश करना होगा. इस तरह की जर्जर व्यवस्था के साथ हम 2047 तो क्या, 2147 तक भी विकसित देश नहीं बन सकते."
सरकार को एक गंभीर चेतावनी देते हुए वांगचुक ने कहा कि यदि शांतिपूर्ण अपीलों को लगातार अनसुना किया गया, तो देश के युवाओं का लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से भरोसा उठ जाएगा.
उन्होंने पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल में हुए हालिया हिंसक छात्र आंदोलनों का उदाहरण देते हुए आगाह किया, "मैं कभी नहीं चाहता कि हमारे देश में वैसी स्थिति पैदा हो. लेकिन अगर सरकार सख्त रुख अपनाती है और कोई जवाबदेही नहीं लेती, तो युवाओं के बीच यह संदेश जाएगा कि शांतिपूर्ण तरीकों का कोई फल नहीं मिलता. ऐसे में वे हिंसक रास्तों की ओर बढ़ सकते हैं, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा."
इस कड़े राजनीतिक गतिरोध के बावजूद, जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन बेहद अनुशासित और शांतिपूर्ण बना हुआ है. वांगचुक ने इसे नागरिक प्रतिरोध का एक "वैश्विक उदाहरण" बताया, जहां अत्यधिक गर्मी के बीच भी स्वयंसेवक स्वच्छता, भोजन और पानी की व्यवस्था को पूरी मुस्तैदी से संभाल रहे हैं. उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों से अपील की है कि वे प्रशासन और अधिकारियों के पास कड़वाहट के बजाय फूल लेकर जाएं.
आखिर में वांगचुक ने सरकार के मौन पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब यह पूरी तरह सरकार पर निर्भर करता है कि वह शांतिपूर्ण आवाजों का सम्मान करे और देश के युवाओं को यह साबित करने का मौका न दे कि शांतिपूर्ण रास्ते कभी काम नहीं आते.