नैटको फ़ार्मा बेचेगी SMA की सस्ती जेनेरिक दवा, 6 लाख V/S 16 हजार रुपये
नई दिल्ली । डेस्क: स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा 'रिसडिपलाम' के जेनेरिक संस्करण के निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने की स्विस फार्मा कंपनी एफ हॉफमैन ला रोश (Roche) की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. इस फैसले से हैदराबाद स्थित नैटको फ़ार्मा को बड़ी राहत मिली है, जो रोश के ब्रांड नाम 'एवरीस्डी' (Evrysdi) के ₹6 लाख प्रति बोतल के मुकाबले अपनी जेनेरिक दवा ₹16,000 प्रति बोतल की कहीं कम कीमत पर बेच रही है.
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति एएस चंद्रकार की पीठ ने शुक्रवार को रोश की अपील पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ और बाद में खंडपीठ द्वारा नैटको को जेनेरिक दवा बेचने से नहीं रोकने के अंतरिम आदेशों में दखल नहीं देगी.
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि चूंकि ये आदेश अंतरिम प्रकृति के हैं और दिल्ली उच्च न्यायालय पहले ही इस मामले में कोई रोक लगाने से इनकार कर चुका है, इसलिए रोश मुख्य मुकदमे में अपना पक्ष रखने के लिए स्वतंत्र है.
हालांकि, पीठ ने उम्मीद जताई है कि दिल्ली उच्च न्यायालय रोश की पेटेंट उल्लंघन चुनौती वाली याचिका का शीघ्र निपटारा करने के लिए कदम उठाएगा.
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक दुर्लभ आनुवंशिक रोग है जो रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है, जिससे मोटर न्यूरॉन्स और अंगों को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप श्वसन संबंधी समस्याएं भी होती हैं.
नैटको की सस्ती जेनेरिक दवा की बिक्री के कारण दोनों कंपनियों के बीच पेटेंट युद्ध छिड़ गया था. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दुर्लभ बीमारियों के मरीज़ों के लिए सस्ती दवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.