सोम, 19 अक्टू. 2026

CGKhabar

दूषित खांसी की सिरप से बच्चों की किडनी फेलियर से मौतें

C

CG Khabar

02 अक्टू. 2025, 12:39 AM 3 मिनट में पढ़ें 4

कफ सीरप
कफ सीरप

जयपुर/भोपाल । डेस्क: मध्य प्रदेश और राजस्थान में दूषित खांसी की सिरप के सेवन से बच्चों की किडनी फेलियर से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) ने दोनों राज्यों के अस्पतालों और अन्य स्थलों से पानी, कीटाणुजन्य और दवा के नमूने एकत्र किए हैं. इन नमूनों की जांच से किसी संक्रामक रोग की संभावना को खारिज करने का प्रयास किया जा रहा है. जांच रिपोर्ट आने के बाद राज्य दवा अधिकारियों के साथ साझा की जाएगी, अधिकारियों ने बताया.


राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (आरएमएससीएल) ने सिरप के 19 बैचों की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने माता-पिता, डॉक्टरों और चिकित्सा संचालकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में 6 बच्चे किडनी फेलियर से मारे गए, जबकि राजस्थान के सीकर जिले में 1 बच्चे की मौत हुई.

विज्ञापन


परिजनों के अनुसार, बच्चे पहले सामान्य सर्दी-खांसी और बुखार से पीड़ित थे, लेकिन जल्द ही उनकी हालत बिगड़ गई और किडनी प्रभावित हो गई, जिससे उनकी असमय मौत हो गई. एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, जांचकर्ताओं को शक है कि सिरप में विषाक्त डाइएथिलीन ग्लाइकॉल मिला हुआ था.


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेश गोदारे ने बताया कि पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था और पहली मौत 7 सितंबर को हुई. "20 सितंबर से मूत्र प्रतिधारण और किडनी संबंधी जटिलताओं के और मामले सामने आए हैं. यह वायरल संक्रमणों का संवेदनशील समय है, लेकिन इतने सारे बच्चों में अचानक किडनी फेलियर कुछ गंभीर की ओर इशारा करता है."


राज्य दवा नियंत्रण अधिकारियों द्वारा सिरप के नमूनों की जांच चल रही है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है. एनसीडीसी की एक टीम ने प्रभावित स्थलों का दौरा कर नमूने संग्रहित किए हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सिरप न दें और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें.


डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) के प्रभाव-


डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) एक विषाक्त रसायन है, जो अक्सर दवाओं या सिरप में मिलावट के कारण मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालता है. यह इथाइलीन ग्लाइकॉल से कम विषाक्त है, लेकिन फिर भी उच्च मात्रा में सेवन से जानलेवा साबित हो सकता है. DEG की विषाक्तता मुख्य रूप से गुर्दे (किडनी), यकृत (लिवर) और चयापचय प्रक्रिया पर पड़ती है, और इसके प्रभाव खुराक पर निर्भर करते हैं.


तत्काल प्रभाव (24 घंटे के अंदर):


*पाचन तंत्र पर: मतली, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और भूख न लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं.

*केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) पर: सिरदर्द, चक्कर आना, सुस्ती या अवसाद.


गंभीर और दीर्घकालिक प्रभाव:


*चयापचय अम्लता (मेटाबोलिक एसिडोसिस): रक्त में अम्लता बढ़ जाती है, जो जानलेवा हो सकती है.

*गुर्दे की क्षति (नेफ्रोटॉक्सिसिटी): तीव्र किडनी इंजरी (AKI) होती है, जो किडनी फेलियर का कारण बनती है. उच्च खुराक में यह प्रभाव विशेष रूप से गंभीर होता है.

*यकृत क्षति (हेपेटोटॉक्सिसिटी): मध्यम स्तर की लीवर क्षति, जो उच्च खुराक पर अधिक स्पष्ट होती है.

*अन्य जटिलताएं: दौरा पड़ना (सीजर्स), कोमा, निम्न रक्तचाप (शॉक), और मृत्यु. बच्चों में यह प्रभाव अधिक तेजी से दिखाई देता है, जैसा कि दूषित सिरप के मामलों में देखा गया है.


DEG के प्रभावों में एक स्पष्ट थ्रेशोल्ड खुराक प्रतिक्रिया होती है, अर्थात् कम खुराक पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन उच्च खुराक पर विषाक्तता अचानक बढ़ जाती है. तत्काल चिकित्सा सहायता से पूर्वानुमान सुधर सकता है, लेकिन देरी से इलाज घातक हो सकता है.


सलाह: दवाओं की गुणवत्ता जांचें और बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई सिरप न दें. यदि संदेह हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें.


(फोटो- प्रतीकात्मक)

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP