POK में भारी बवाल: पाक के खिलाफ हजारों सड़कों पर, 2 की मौत
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सोमवार से शुरू हुए विशाल विरोध प्रदर्शन ने तीव्र रूप धारण कर लिया है, जिसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंदोलन माना जा रहा है. अवामी एक्शन कमिटी (एएसी) के नेतृत्व में हजारों लोग मौलिक अधिकारों, भोजन सब्सिडी, बिजली दरों में कमी और शरणार्थी सीटों के खात्मे जैसे 38 मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए.
रावलकोट, मीरपुर, कोटली, नीलम वैली और मुजफ्फराबाद समेत कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ नारे लगाए. वीडियो फुटेज में भारी भीड़ दिखाई दे रही है, हालांकि इनकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई.
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और रेंजर्स के साथ झड़पों में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और दर्जनों घायल हुए. मुजफ्फराबाद में गोलीबारी की खबरें हैं.
पाकिस्तान ने स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त 1000 पुलिसकर्मी तैनात किए, शहरों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए और मोबाइल, इंटरनेट व सोशल मीडिया सेवाओं पर आंशिक प्रतिबंध लगा दिया.
अवामी एक्शन कमिटी ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया था, लेकिन हिंसा के डर से इसे 15 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया.
अवामी एक्शन कमिटी नेता शौकत नवाज मीर ने कहा, "बस बहुत हुआ. या तो हमारे अधिकार सुनिश्चित करें, वरना जनता का गुस्सा झेलें." एक प्रदर्शनकारी ने बताया, "हमारा संघर्ष किसी संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि 70 साल से छीने जा रहे अधिकारों के लिए है."
अवामी एक्शन कमिटी का आरोप है कि पाक सरकार पीओके के विकास की अनदेखी कर रही है. हाल की बातचीत विफल रहने के बाद यह आंदोलन भड़का.
मांगों में मंगला बांध और नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली बिजली का उचित मूल्य, प्रशासनिक सुधार और शरणार्थी आठों का उन्मूलन शामिल है. जिला मजिस्ट्रेट मुदस्सिर फारूक ने कहा, "शांति बनाए रखना सभी का दायित्व है, लेकिन जनजीवन बाधित करने वालों पर कार्रवाई होगी."
इस साल की शुरुआत में भी गिलगित-बाल्टिस्तान में बिजली कटौती के खिलाफ विरोध हुए थे, जो चीन-पाक व्यापार को प्रभावित करने वाले थे.
कुछ पीओके निवासी लंबे समय से भारत के साथ विलय की मांग कर रहे हैं.
हाल ही में मोरक्को यात्रा पर भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "पाक अधिकृत कश्मीर पर हमला करने की जरूरत नहीं, यह खुद-ब-खुद भारत का हिस्सा बनेगा."