PM मोदी RSS के शताब्दी वर्ष पर डाक टिकट, सिक्का जारी करेंगे
नई दिल्ली । डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर 1 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में एक डाक टिकट और सिक्का जारी करेंगे. सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले भी शामिल होंगे.
आरएसएस, जो सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक मूल संस्था है, इस वर्ष विजयादशमी के दिन, यानी 2 अक्टूबर 2025 को अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रही है.
पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद विजयादशमी समारोह में मुख्य अतिथि होंगे
2 अक्टूबर को होने वाले आरएसएस के विजयादशमी समारोह में पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे. आयोजन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि आरएसएस पर डाक टिकट जारी करने का विचार पहले से निर्धारित डाक टिकटों की सूची में शामिल नहीं था.
एक अधिकारी ने कहा, “यह प्रधानमंत्री का एक सहज विचार था, जिस पर विचार-विमर्श और कार्यान्वयन रिकॉर्ड समय में किया गया.”
भाजपा और आरएसएस के बीच मतभेदों को दूर करने की रणनीति
इस कदम को विपक्ष द्वारा भाजपा और आरएसएस के बीच कथित ‘मतभेदों’ को समाप्त करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है. विपक्ष अक्सर भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी को लेकर टिप्पणी करता है, जिसे सूत्रों ने दोनों संगठनों के बीच विवाद का कारण बताया है.
हालांकि, भाजपा और आरएसएस दोनों ने कई मौकों पर इन मतभेदों की बात को खारिज करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य और विचारधारा एक ही है - राष्ट्र की सेवा.
इस वर्ष मार्च में, प्रधानमंत्री मोदी 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नागपुर गए थे. अपने सार्वजनिक संबोधन में उन्होंने आरएसएस को भारत की अमर संस्कृति का ‘वटवृक्ष’ बताया.
प्रधानमंत्री ने आरएसएस की प्रशंसा की
15 अगस्त को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में, प्रधानमंत्री ने आरएसएस को “विश्व का सबसे बड़ा एनजीओ” बताते हुए इसकी सिविल सोसाइटी में ‘अथक’ कार्य के लिए सराहना की. उन्होंने आरएसएस के शताब्दी वर्ष को ‘भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय’ करार दिया.
इस महीने की शुरुआत में, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के जन्मदिन के अवसर पर, पीएम मोदी ने एक लेख लिखकर उनकी प्रशंसा की. उन्होंने भागवत को ‘असाधारण’ व्यक्तित्व बताया, जो अपने कार्य में निरंतरता और अनुकूलन को अपनाते हैं और हमेशा राष्ट्र को प्रथम स्थान देते हैं.
28 सितंबर 2025 को अपने 126वें ‘मन की बात’ संबोधन में, प्रधानमंत्री ने आरएसएस की सदी लंबी यात्रा को “अभूतपूर्व और प्रेरणादायी” बताते हुए राष्ट्र निर्माण में संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला.