संसद मार्ग प्रदर्शन: 17 को जमानत, कस्टडी टॉर्चर पर रिपोर्ट तलब
नई दिल्ली । डेस्क: संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार किए गए 17 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है. अदालत ने आरोपियों की कम उम्र और उनके छात्र होने के आधार पर यह फैसला सुनाया. वहीं, दो प्रदर्शनकारियों द्वारा हिरासत के दौरान मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अदालत ने कस्टडी टॉर्चर पर दिल्ली पुलिस से जवाब तलब किया है.
ड्यूटी ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनिमेष कुमार ने सोमवार देर रात यह आदेश जारी किया. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और असहमति जताने का संवैधानिक अधिकार है.
हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध की आड़ में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई या उन पर हमला करना बेहद गंभीर मामला है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता.
मामला सोमवार का है जब एसआईआर (SIR) विवाद के दौरान एक महिला पत्रकार से बदसलूकी के आरोप में पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने के बाहर लगभग 50 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.
पुलिस का आरोप था कि प्रदर्शनकारी गैर-कानूनी तरीके से एकत्र हुए, सार्वजनिक स्थान को बाधित किया और हिरासत में लिए जाने के दौरान महिला पुलिसकर्मी समेत अधिकारियों के साथ बदसलूकी की. इसके अलावा, पुलिस बस के शीशे तोड़े जाने और जांच में सहयोग न करने के आरोप भी लगाए गए थे.
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के वकीलों ने तर्क दिया कि गिरफ्तार किए गए अधिकांश लोग युवा और छात्र हैं जो केवल लोकतांत्रिक अधिकार के तहत प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज पेश नहीं किया गया और चोटिल प्रदर्शनकारियों की मेडिकल जांच में देरी की गई.
अदालत ने नोट किया कि मामले में शामिल अधिकतर धाराएं जमानती हैं और भारतीय न्याय संहिता की धारा 132 के तहत अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है. आरोपियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उनका पूरा करियर सामने पड़ा है.
इसे ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सभी 17 आरोपियों को 15,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. जमानत के साथ देश न छोड़ने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने जैसी शर्तें भी लगाई गई हैं.
सुनवाई के दौरान आरोपी धर्मेंद्र और समर्थ सिंह ने अदालत को बताया कि हिरासत में लिए जाने के बाद थाने के अंदर उनके साथ मारपीट की गई, जबकि शेख यूनुस ने प्रदर्शन के दौरान धक्का-मुक्की में चोट लगने की बात कही.
मेडिकल रिपोर्ट में आरोपियों के शरीर पर खरोंच और सूजन जैसी चोटों की पुष्टि हुई है.
कस्टडी टॉर्चर के इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने पुलिस उपायुक्त (नई दिल्ली) से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और संसद मार्ग थाने के संबंधित सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं.