नेपाल: गिरफ्तारी के डर से 'भयभीत' पूर्व PM ओली
काठमांडू । डेस्क: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने वर्तमान अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व सुशीला कार्की कर रही हैं, पर उन्हें "बिना किसी कारण" गिरफ्तार करने की कोशिश करने का गंभीर आरोप लगाया है. सितंबर की शुरुआत में 'जनरेशन ज़ी' (Gen Z) आंदोलन के चलते सत्ता से हटने के बाद रविवार को अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में, सीपीएन-यूएमएल (CPN-UML) के अध्यक्ष ओली ने अंतरिम सरकार के कामकाज और आम चुनाव कराने की उसकी मंशा पर भी सवाल उठाए.
काठमांडू में वरिष्ठ पत्रकारों के साथ एक घंटे लंबी बातचीत में, ओली ने अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि कार्की सरकार उन्हें किसी भी तरह से गिरफ्तार करने की फिराक में है, जबकि इसका कोई ठोस आधार नहीं है. इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा भंग की गई प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) को बहाल करने की मांग भी दोहराई.
गौरतलब है कि सितंबर में भ्रष्टाचार और सरकारी अधिकारियों के बच्चों की विलासितापूर्ण जीवनशैली के खिलाफ युवा नेतृत्व वाले Gen Z के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. प्रदर्शनकारी युवाओं ने ओली की गिरफ्तारी की मांग की थी, उनका आरोप था कि आंदोलनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के लिए ओली जिम्मेदार हैं.
ओली ने पलटवार करते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ और हथियारों का इस्तेमाल 'बाहरी लोगों' ने किया था, हालांकि उन्होंने उनकी पहचान उजागर नहीं की.
पूर्व पीएम ने अपनी सुरक्षा में कटौती करने के लिए भी कार्की सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि उनके जीवन को खतरा होने के बावजूद यह कदम उठाया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार देश में "स्वच्छ और निष्पक्ष" चुनाव कराने के लिए उपयुक्त माहौल नहीं बना रही है, जबकि अगला आम चुनाव 5 मार्च, 2026 को निर्धारित है.
ओली ने यह भी बताया कि आंदोलनकारियों द्वारा उनके आधिकारिक आवास बालुवाटार पर हमला किए जाने के बाद सेना ने उन्हें बचाया था. उन्होंने यह भी शिकायत की कि बाद में उनका फोन कुछ दिनों के लिए जब्त कर लिया गया था.
Gen Z युवाओं के, राजनेताओं और प्रभावशाली लोगों के बच्चों की महंगी जीवनशैली के विरोध को लेकर, ओली ने आलोचना करते हुए कहा, "मैं इस चीज को स्वीकार्य नहीं मानता. इसने नेपालियों के बीच आतंक पैदा कर दिया था."
ओली ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी पार्टी का पद नहीं छोड़ा है और वह अभी भी सीपीएन-यूएमएल के चेयरमैन हैं. उन्होंने संकेत दिया कि यदि लोग चाहेंगे तो वह फिर से सत्ता में लौट सकते हैं.