नेपाल में संस्थागत प्रसव बढ़ा लेकिन मातृ मृत्यु की चुनौतियां बरकरार
काठमांडू । डेस्क: नेपाल के स्वास्थ्य क्षेत्र से एक उत्साहजनक खबर सामने आई है, जहां सुरक्षित मातृत्व की दिशा में देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. 'नेपाल मल्टीपल इंडिकेटर सर्वे 2024-25' की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, देश में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में होने वाली डिलीवरी) की दर साल 2022 के 80 प्रतिशत से बढ़कर अब 90.5 प्रतिशत हो गई है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय और यूनिसेफ के सहयोग से तैयार इस रिपोर्ट से पता चलता है कि सरकार के निरंतर प्रयासों और 'फ्री डिलीवरी' जैसी योजनाओं के कारण अब अधिक महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों का रुख कर रही हैं. इसके साथ ही, कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच कराने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या भी 81 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत पर पहुंच गई है.
क्षेत्रीय स्तर पर आंकड़ों का विश्लेषण करें तो गण्डकी प्रांत 97.3 प्रतिशत संस्थागत प्रसव दर के साथ देश में सबसे आगे है, जबकि लुम्बिनी (96.3%) और बागमती (94.1%) भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.
हालांकि, मधेश प्रांत में स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां यह दर केवल 83.2 प्रतिशत है और ग्रामीण इलाकों में आज भी लगभग 20.5 प्रतिशत महिलाएं घर पर ही प्रसव कराने को मजबूर हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि घर पर होने वाली डिलीवरी मातृ मृत्यु के मुख्य कारणों में से एक है, क्योंकि आपातकालीन स्थिति में वहां चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं होती.
बढ़ते आंकड़ों के बावजूद, स्वास्थ्य अधिकारी मातृ मृत्यु दर (MMR) में धीमी गिरावट को लेकर चिंतित हैं. फैमिली वेलफेयर डिवीजन की वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी निशा जोशी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 में मातृत्व संबंधी जटिलताओं के कारण 224 महिलाओं की जान गई, जो एक अलार्म की तरह है.
वर्तमान में नेपाल में प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर लगभग 142 महिलाओं की मृत्यु हो रही है.
विशेषज्ञों ने प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (PPH), गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप (एक्लेम्पसिया), संक्रमण और समय पर विशेषज्ञ देखभाल न मिल पाने को मौतों का मुख्य कारण बताया है.
हालांकि सरकार ने जोखिमों की जल्द पहचान के लिए प्रसव पूर्व जांच की संख्या 4 से बढ़ाकर 8 कर दी है, लेकिन रिपोर्ट कहती है कि केवल 36.1 प्रतिशत महिलाएं ही इस मानक को पूरा कर पा रही हैं.
नेपाल ने 1996 में मातृ मृत्यु दर 539 से घटाकर 2016 में 239 करने पर सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (MDG) पुरस्कार जीता था, और अब देश का लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के तहत 2030 तक इसे 75 तक लाना है.
सरकार ने इसके लिए 2,800 से अधिक बर्थिंग सेंटर स्थापित किए हैं और नर्सों को 'स्किल्ड बर्थ अटेंडेंट' (SBA) के रूप में प्रशिक्षित किया है. इसके अलावा, प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव को रोकने के लिए महिला सामुदायिक स्वास्थ्य स्वयंसेवकों के माध्यम से मिसोप्रोस्टोल दवा का वितरण भी किया जा रहा है.
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि यदि समय पर रेफरल प्रणाली और विशेषज्ञ देखभाल में सुधार किया जाए, तो नेपाल अपने 2030 के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल हो सकता है.