महानदी जल विवाद: ओडिशा ने तैयार किया मसौदा समझौता
भुवनेश्वर । डेस्क: महानदी के जल बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब सुलझने की राह पर है. 1953 में निर्मित विश्व के सबसे बड़े बांध, हीराकुंड जलाशय के बाद, गैर-मानसून महीनों में महानदी में पानी की निरंतर धारा की उम्मीद धूमिल पड़ गई थी. लेकिन अब, ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र के छत्तीसगढ़ और निचले क्षेत्र के ओडिशा के बीच सहमति ने एक बार फिर संभावना बनी है.
जल संसाधन मंत्रालय की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सचिवीय समीक्षाओं के बाद, इस जटिल विवाद का समाधान निकट दिखाई दे रहा है. नवीनतम घटनाक्रम में, दोनों राज्यों ने महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल को 21 सितंबर, 2025 तक अपनी-अपनी मसौदा सहमति प्रस्तुत करने पर सहमति जताई है.
ओडिशा सरकार ने, नदी के निचले हिस्से के दावेदार के रूप में, जल विज्ञान विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों की मदद से एक विस्तृत मसौदा समझौता तैयार किया है.
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, यह मसौदा ट्रांसबाउंड्री वाटर लॉ विशेषज्ञ मोहन कटारकी और वरिष्ठ अधिवक्ता अनिंदिता पुजारी, जो ओडिशा के लिए सलाहकार हैं, द्वारा मंगलवार को नई दिल्ली में तैयार किया गया.
इसमें कुछ तकनीकी आंकड़ों को शामिल करने के बाद, ओडिशा सरकार जल्द ही इसे अंतिम रूप देगी. जल संसाधन अधिकारियों के अनुसार, यह अंतिम मसौदा ओडिशा के महाधिवक्ता द्वारा महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल को सौंपा जाएगा, जो एक सौहार्दपूर्ण समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगा.
हालांकि मसौदे का विवरण अभी गोपनीय है, लेकिन यह अनुमान है कि विशेषज्ञों ने ओडिशा के लिए महानदी के जल संसाधनों में उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनी सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञता का उपयोग किया है. महानदी को ओडिशा की जीवनरेखा माना जाता है, और यह मसौदा राज्य के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है.
महानदी जल विवाद छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच जल बंटवारे को लेकर है. ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी क्षेत्र में बनाए गए बांधों और बैराजों ने नदी के प्रवाह को प्रतिबंधित कर दिया है, जिसका असर ओडिशा के निचले क्षेत्र में कृषि और आजीविका पर पड़ रहा है, खासकर गैर-मानसून महीनों में.
यह विवाद दशकों से चला आ रहा है.
2016 में, ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत एक ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की. इसके बाद, केंद्र सरकार ने 2018 में महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया. ट्रिब्यूनल ने आंकड़ों का संग्रह, निरीक्षण और सुनवाई का काम किया.
विवाद का तीसरा चरण तब सामने आया जब ओडिशा ने छत्तीसगढ़ द्वारा ऊपरी क्षेत्र में मौजूदा और प्रस्तावित बांधों और बैराजों के निर्माण पर आपत्ति जताई.
अब इस मसौदे के साथ, ओडिशा ने एक सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है.