रामलीला से पूनम पांडे को हटाया, VHP और BJP के विरोध के बाद
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ताओं ने पूनम पांडे को दिल्ली की 46 साल पुरानी लव कुश रामलीला में मंदोदरी (रावण की पत्नी) की भूमिका से हटाने के निर्णय का स्वागत किया है. BJP के दिल्ली मीडिया प्रमुख और प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पूनम पांडे को मंदोदरी की भूमिका से हटाकर लव कुश रामलीला समिति ने धार्मिक समुदाय और आम जनता की भावनाओं का सम्मान किया है.
VHP दिल्ली क्षेत्र के सचिव सुरेंद्र गुप्ता ने भी इस निर्णय की सराहना की और कहा कि उनकी संस्था किसी कलाकार का विरोध नहीं कर रही, बल्कि रामायण जैसे पवित्र ग्रंथों से संबंधित सार्वजनिक आयोजनों की सांस्कृतिक प्रामाणिकता और भक्तों की आस्था की रक्षा कर रही है.
लव कुश रामलीला समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए बताया कि हिंदू समुदाय के लोगों के विरोध के कारण मंदोदरी की भूमिका के लिए अभिनेत्री को बदलने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि पूनम पांडे को इस बदलाव के बारे में सूचित कर दिया गया है. कुमार ने बताया कि पूनम पांडे इस भूमिका को लेकर उत्साहित थीं और उन्होंने भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए व्रत भी रखा था.
एकता और शांति के लिए बदलाव
अर्जुन कुमार ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें पूनम पांडे को रामलीला से हटाना पड़ रहा है. भगवान राम ने दुनिया को एकता और शांति का पाठ पढ़ाया था. अगर रामलीला में किसी के चयन को लेकर लोगों की राय बंट रही है, तो यह इस नाटक और भगवान के जीवन के पाठ के उद्देश्य को विफल कर देगा." उन्होंने आगे कहा, "हम नहीं चाहते कि रामलीला के नाम पर समाज में विभाजन हो, इसलिए पूनम पांडे से अलग होने का निर्णय लिया गया. फिर भी, मैं कहूंगा कि हर किसी को बदलने का मौका देना चाहिए."
BJP और VHP ने किया निर्णय का स्वागत
BJP के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पूनम पांडे को मंदोदरी की भूमिका में लेने की घोषणा ने धार्मिक नेताओं, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में व्यापक आक्रोश पैदा किया था. उन्होंने इस निर्णय को धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने वाला कदम बताया. VHP के सुरेंद्र गुप्ता ने अपने पत्र में कहा था कि रामायण जैसे पवित्र ग्रंथों से जुड़े आयोजनों में सांस्कृतिक प्रामाणिकता बनाए रखना जरूरी है.