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सिंह की आबादी बढ़ कर हुई 891

देश में बाघों, हाथियों और शेरों की जनगणना

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24 जुल. 2025, 01:55 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

शेर
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नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण राज्यों के साथ मिलकर प्रत्‍येक चार वर्ष में अखिल भारतीय बाघ अनुमान लगाता है, जिसके आधार पर बाघों की आबादी वर्ष 2018 में 2967 की तुलना में वर्ष 2022 में बढ़कर 3682 हो गई है. 


गुजरात द्वारा वर्ष 2025 में किये गये 16 वें सिंह जनसंख्या अनुमान के अनुसार सिंहों की आबादी में वृद्धि हुई है, वर्ष 2025 में अनुमानित संख्या 891 है, जबकि वर्ष 2020 में यह 674 थी. 


देश में हाथियों का नवीनतम अनुमान वर्ष 2017 में पूरा हुआ था. वर्ष 2012 में हाथियों की अनुमानित आबादी 29391-30711 की तुलना में वर्ष 2017 में 29964 आंकी गई थी.


केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरूवार यह जानकारी राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है.


गौरतलब है कि बाघों के संरक्षण के लिए देश में 58 बाघ अभयारण्य अधिसूचित किये गये हैं, जो देश के लगभग 2.5 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र पर फैले हुए हैं.


सिंहों के संदर्भ में गुजरात के बरदा में सिंहों के लिये एक दूसरा आवास बनाया है और गुजरात में एशियाई सिंहों की आवास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवास सुधार कार्य, गलियारा विकास, संरक्षित क्षेत्रों के बाहर घास के मैदानों में सुधार जैसे कार्य किए जा रहे हैं.


हाथियों के संरक्षण के लिये 14 हाथी क्षेत्र वाले राज्यों में 33 हाथी अभयारण्य स्थापित किये गये हैं.


प्रोजेक्ट एलीफेंट की शुरुआत वर्ष 1992 में हाथियों, उनके आवास और गलियारों की सुरक्षा, मानव-हाथी संघर्ष की समस्याओं के समाधान और देश में बंदी हाथियों के कल्याण के उद्देश्य से की गई थी. हाथियों के संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करने और आपसी तालमेल बढ़ाने तथा संघर्ष को कम करने के लिए महत्वपूर्ण हाथी आवासों को 'हाथी रिजर्व' के रूप में अधिसूचित किया गया है.


प्रोजेक्ट टाइगर की चालू केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता बाघ अभयारण्यों को बुनियादी ढांचे और सामग्री के संदर्भ में क्षमता हासिल करने के लिये प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने स्रोत क्षेत्रों से बाहर फैल रहे बाघों से निपट सकें. बाघ अभयारण्यों द्वारा हर साल एक वार्षिक संचालन योजना के माध्यम से ये सहायता मांगी जाती है, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 38वीं के तहत अनिवार्य बाघ संरक्षण योजना से निकलती है.


किसी बाघ अभयारण्य में बाघों की वहन क्षमता के आधार पर, एक व्यापक बाघ संरक्षण योजना के माध्यम से आवास हस्तक्षेपों को प्रतिबंधित किया जाता है. यदि बाघों की संख्या वहन क्षमता के स्तर पर है, तो यह सलाह दी जाती है कि आवास हस्तक्षेपों को सीमित किया जाना चाहिये ताकि बाघों सहित वन्यजीवों का अत्यधिक फैलाव न हो, जिससे मानव-पशु संघर्ष न्यूनतम हो.


बाघ अभयारण्यों के आसपास के बफर क्षेत्रों में, आवास हस्तक्षेपों को इस प्रकार प्रतिबंधित किया जाता है कि वे मुख्य, महत्वपूर्ण बाघ आवास क्षेत्रों की तुलना में उप-इष्टतम हों और केवल अन्य समृद्ध आवास क्षेत्रों में ही फैलाव को सुगम बनाने के लिये पर्याप्त विवेकपूर्ण हों. 

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP