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ईरान में मानवाधिकारों का हनन गंभीर- नोबेल विजेता शिरीन एबादी

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09 फ़र. 2026, 07:17 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

शिरीन एबादी
शिरीन एबादी

काठमांडू । डेस्क: नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता शिरीन एबादी ने ईरान में मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि वहां की सरकार जनता की इच्छा के बजाय कठोर धार्मिक विचारधारा के आधार पर कानून लागू कर रही है. कांतिपुर कॉन्क्लेव 2026 में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्होंने लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा में युवाओं की भूमिका को निर्णायक बताया.


एबादी ने कहा कि ईरान में पिछले चार दशकों से नागरिक लोकतांत्रिक अधिकारों और महिलाओं के हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर आंदोलन को गिरफ्तारियों, दमन और हिंसा का सामना करना पड़ा है. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद देश की युवा पीढ़ी चुप नहीं बैठी है और लगातार सरकार से सवाल कर रही है.

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उन्होंने सितंबर 2022 में पुलिस हिरासत में एक युवती की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण आंदोलनों को दबाने के लिए गोलीबारी तक की और घायलों को अस्पतालों से गिरफ्तार किया गया.


नेपाल की चर्चा करते हुए एबादी ने सितंबर 2025 के जेन-Z आंदोलन की सराहना की और कहा कि यह आंदोलन लोकतंत्र और जवाबदेही की मांग के लिए था, जो प्रेरणादायक है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे केवल विरोध तक सीमित न रहें, बल्कि मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी करें.


एबादी ने कहा कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है जब अल्पसंख्यकों के अधिकारों का सम्मान हो और सरकारें किसी विचारधारा के बजाय जनता के प्रति जवाबदेह हों. उन्होंने दुनिया भर की सरकारों से अपने नागरिकों की आवाज सुनने और मानवाधिकारों की रक्षा करने वाली संस्थाओं को मजबूत करने का आह्वान किया.


गौरतलब है कि शिरीन एबादी ईरान की प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं. वे वर्ष 2003 में नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली पहली ईरानी और पहली मुस्लिम महिला हैं. उन्हें यह सम्मान ईरान में लोकतंत्र, मानवाधिकारों और खासकर महिलाओं व बच्चों के अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष के लिए मिला.


एबादी ईरान की पहली महिला न्यायाधीश भी रही हैं, लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के चलते उन्हें न्यायाधीश पद से हटा दिया गया. इसके बाद उन्होंने वकालत के माध्यम से राजनीतिक कैदियों, अल्पसंख्यकों और दमन के शिकार लोगों के मामलों की पैरवी शुरू की.


सरकार की नीतियों की आलोचना करने के कारण उन्हें कई बार धमकियों, गिरफ्तारी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा. अंततः उन्हें ईरान छोड़कर निर्वासन में रहना पड़ा, लेकिन वे आज भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ईरान और अन्य देशों में मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठाती हैं.


शिरीन एबादी को विश्व स्तर पर निडर, स्वतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूत समर्थक के रूप में जाना जाता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP