शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

SC: फांसी के बजाये Lethal Injection से मृत्युदंड का केन्द्र ने विरोध किया

C

CG Khabar

15 अक्टू. 2025, 05:07 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

जहरीला इंजेक्शन
जहरीला इंजेक्शन

नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट में मृत्युदंड देने की प्रक्रिया को बदलने के लिए दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने फांसी की जगह जानलेवा इंजेक्शन (Lethal Injection) का इस्तेमाल करने की मांग का विरोध किया है. केंद्र ने कहा है कि जानलेवा इंजेक्शन का उपयोग 'बहुत अधिक कारगर' (very much effective) नहीं हो सकता है.


याचिकाकर्ता वकील ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने दलील दी कि फांसी 'क्रूर और बर्बर' है, क्योंकि इसमें दोषी का शरीर लगभग 40 मिनट तक फांसी के फंदे पर लटका रहता है. इसके मुकाबले, जानलेवा इंजेक्शन से मृत्युदंड देना 'तेज़, मानवीय और शालीन' है. उन्होंने मांग की कि दोषी को फांसी या जानलेवा इंजेक्शन में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाना चाहिए, जैसा कि अमेरिका के 50 में से 49 राज्यों में अपनाया गया है.


हालांकि, केंद्र के वकील ने बताया कि केंद्र पहले ही एक जवाब में कह चुका है कि यह विकल्प प्रदान करना बहुत अधिक संभव नहीं हो सकता है.


इस पर जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की, "समस्या यह है कि सरकार समय के साथ बदलाव लाने के लिए तैयार नहीं है. समय के साथ स्थिति बदल गई है."


केंद्र के वकील ने कहा कि सरकार ने एक हलफनामा दाखिल किया है जिसमें कहा गया है कि यह एक नीतिगत निर्णय है और इस पर फैसला लेने का अधिकार सरकार के पास है.


याचिकाकर्ता ने 2023 के मई में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश का भी उल्लेख किया, जिसके तहत अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा था कि सरकार इन मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने पर विचार कर रही है. केंद्र के वकील ने आश्वासन दिया कि वह समिति के संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में सरकार से जानकारी लेंगे.


इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को होनी है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP