रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

एडिटर्स गिल्ड ने दिल्ली कोर्ट के आदेश पर चिंता जताई

C

CG Khabar

18 सित. 2025, 12:36 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

एडिटर्स गिल्ड
एडिटर्स गिल्ड

नई दिल्ली । डेस्क: एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने दिल्ली की एक अदालत के उस आदेश पर चिंता व्यक्त की, जिसमें पत्रकारों को अडानी एंटरप्राइजेज के बारे में "असत्यापित, अपुष्ट और स्पष्ट रूप से मानहानिकारक" सामग्री प्रकाशित करने से रोका गया है. गिल्ड ने चेतावनी दी कि यह आदेश, सरकार की कार्रवाई के साथ मिलकर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने और प्रेस की स्वतंत्रता को कमजोर करने का जोखिम पैदा करता है.


गिल्ड ने अपने बयान में कहा, "ऐसे व्यापक अधिकार जो एक कॉरपोरेट संस्था को दिए गए हैं, और सरकार द्वारा टेकडाउन निर्देश जारी करने की कार्रवाई, सेंसरशिप की ओर एक कदम है. यह वैध रिपोर्टिंग, टिप्पणी और व्यंग्य को प्रभावित कर सकता है, साथ ही अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को कमजोर कर सकता है."

विज्ञापन


गिल्ड ने न्यायपालिका से आग्रह किया कि मानहानि के दावों को उचित प्रक्रिया के माध्यम से संबोधित किया जाए, न कि एकतरफा निषेधाज्ञाओं के जरिए, जो पहले से ही रोकथाम के समान हों. साथ ही, सरकार से संयम बरतने और निजी मुकदमों में निजी पक्षों के लिए प्रवर्तन इकाई के रूप में कार्य करने से बचने की अपील की.


गिल्ड ने कहा, "एक स्वतंत्र और निडर प्रेस लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है. कोई भी ऐसी व्यवस्था जो निजी हितों को आलोचनात्मक या असुविधाजनक आवाजों को एकतरफा चुप कराने की अनुमति देती है, वह जनता के जानने के अधिकार के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है."


यह चिंता रोहिणी जिला अदालत के उस आदेश के बाद सामने आई है, जिसमें अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड बनाम परंजॉय गुहा ठाकुरता और अन्य मामले में एक एक्स पार्टे "जॉन डो" निषेधाज्ञा दी गई. 


इस आदेश में नौ नामित पत्रकारों और संगठनों, साथ ही अज्ञात अन्य लोगों को, कंपनी के बारे में कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री प्रकाशित करने या प्रसारित करने से रोका गया है.


आदेश के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज को उन यूआरएल और लिंक को मध्यस्थों या सरकारी एजेंसियों को भेजने की अनुमति है, जिन्हें वह मानहानिकारक मानता है, और फिर इन सामग्रियों को 36 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है.


इस आदेश के बाद, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने यूट्यूब और इंस्टाग्राम सहित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए, जिसमें 138 से अधिक यूट्यूब लिंक और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने के निर्देश दिए गए. यह नोटिस मेटा और गूगल, जो इंस्टाग्राम और यूट्यूब के मालिक हैं, को भेजा गया.


मंगलवार रात को मंत्रालय ने न्यूजलॉन्ड्री, द वायर, और एचडब्ल्यू न्यूज सहित समाचार आउटलेट्स, पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता, अजीत अंजुम, रवीश कुमार, और व्यंग्यकार आकाश बनर्जी को इस आदेश का पालन करने का निर्देश दिया.


6 सितंबर को एक वरिष्ठ सिविल जज ने यह एक्स पार्टे आदेश पारित किया था, जिसमें प्रतिवादियों को वादी द्वारा कथित रूप से मानहानिकारक सामग्री, जो उनके व्यवसायों को निशाना बनाती है, को हटाने का निर्देश दिया गया था. एक्स पार्टे आदेश वह होता है, जो बिना बचाव पक्ष को सुने जारी किया जाता है.


मंत्रालय ने कहा, "आपको उपरोक्त आदेश का पालन करने के लिए उचित कार्रवाई करने और इस संचार के जारी होने के 36 घंटे के भीतर कार्रवाई की जानकारी मंत्रालय को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाता है."

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP