CRPF ने राहुल गांधी को लेकर जताई चिंता, कांग्रेस ने कहा डराने की कोशिश
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सुरक्षा प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को लेकर चिंता जताई है. सीआरपीएफ की वीआईपी सुरक्षा इकाई ने गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को एक पत्र भेजा, जिसमें राहुल गांधी के देश-विदेश के दौरे के दौरान "बिना सूचना के अनियोजित गतिविधियों" पर ध्यान दिलाया गया.
पत्र में कहा गया कि इस तरह के कदम वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता को कमजोर करते हैं.
राहुल गांधी, जो सीआरपीएफ की जेड-प्लस (एएसएल) सुरक्षा प्राप्त हैं, को लगभग 10-12 सशस्त्र कमांडो की सुरक्षा प्रदान की जाती है. प्रोटोकॉल के तहत, उन्हें अपनी यात्रा और गतिविधियों की पहले से सूचना देनी होती है ताकि सुरक्षा इकाई उचित व्यवस्था कर सके.
सीआरपीएफ ने अपने पत्र में राहुल गांधी के मलेशिया, इटली, लंदन, वियतनाम, कतर और दुबई की यात्राओं का उल्लेख किया और कहा कि इनके लिए पहले से सूचना नहीं दी गई.
कांग्रेस ने इस पत्र के समय और इसे तुरंत सार्वजनिक करने पर सवाल उठाए हैं.
कांग्रेस के मीडिया और प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, "सीआरपीएफ का यह पत्र और इसका तुरंत सार्वजनिक होना परेशान करने वाले सवाल उठाता है. यह पत्र उस समय आया है जब राहुल गांधी 'वोट चोरी' के खिलाफ बीजेपी और चुनाव आयोग की मिलीभगत का मुद्दा उठा रहे हैं."
खेड़ा ने पूछा, "क्या यह विपक्ष के नेता को डराने की एक छिपी कोशिश है, जो जल्द ही एक और बड़ा खुलासा करने वाले हैं?"
राहुल गांधी ने हाल ही में बीजेपी पर "वोट चोरी" का आरोप लगाया था और दावा किया था कि उनके पास इसके सबूत हैं. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही और "विस्फोटक सबूत" पेश करेंगे.
पिछले महीने बिहार में उनकी वोटर अधिकार यात्रा के दौरान एक सुरक्षा चूक हुई थी, जब एक अज्ञात व्यक्ति ने राहुल को मोटरसाइकिल पर अचानक गले लगा लिया था. सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर उस व्यक्ति को हटाया था.
इससे पहले 2022 में, सीआरपीएफ ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने 2020 के बाद से 113 बार सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है. यह बयान भारत जोड़ो यात्रा के दौरान दिल्ली में सुरक्षा चूक के बाद आया था.
2019 में, नरेंद्र मोदी सरकार ने राहुल, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की विशेष सुरक्षा समूह सुरक्षा हटा दी थी, यह कहते हुए कि उन्हें कोई "प्रत्यक्ष खतरा" नहीं है. इसके बाद उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआरपीएफ को सौंपी गई थी.