दुर्ग नन केस: नारायणपुर में CPI करेगी धरना, FIR की मांग
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने घोषणा की है कि वह 5 सितंबर, 2025 को नारायणपुर में दुर्ग रेलवे स्टेशन पर ननों और आदिवासी लड़कियों पर हुए हमले के दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग को लेकर एक विशाल धरना आयोजित करेगी. पार्टी ने एक प्रेस बयान में कहा कि शुक्रवार को नारायणपुर कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा.
जिसमें हमलावरों के खिलाफ तत्काल FIR, तीनों लड़कियों के लिए सुरक्षा और न्याय, तथा आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर सांप्रदायिक हमलों को रोकने की मांग की जाएगी.
सीपीआई ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार संवैधानिक अधिकारों को बनाए रखने में पूरी तरह विफल रही है. बयान में कहा गया कि दुर्ग रेलवे स्टेशन पर केरल की दो ननों और नारायणपुर की तीन आदिवासी लड़कियों पर हुए हमले को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बजरंग दल के हमलावरों के खिलाफ एक भी FIR दर्ज नहीं की गई है.
इसके विपरीत, पीड़ितों को उत्पीड़न, अपमान और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के सदस्यों ने पीड़ितों की पीड़ा को संबोधित करने के बजाय उनकी धार्मिक पहचान पर सवाल उठाए, जो प्रशासन की सांप्रदायिक पक्षपात और संघ परिवार के संगठनों के साथ मिलीभगत को दर्शाता है.
25 जुलाई, 2025 को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर केरल की दो कैथोलिक ननों-सिस्टर प्रीति (या प्रीथी), मैरी (45-55 वर्ष) और सिस्टर वंदना फ्रांसिस (50-53 वर्ष)-तथा एक स्थानीय युवक सुखमन मंडावी को गिरफ्तार किया गया था.
उन पर नारायणपुर की तीन वयस्क आदिवासी महिलाओं को नर्सिंग नौकरी के बहाने आगरा ले जाकर मानव तस्करी और जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया गया था.
इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 143 (मानव तस्करी) और छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 की धारा 4 (जबरन धर्म परिवर्तन) के तहत मामला दर्ज किया गया. शुरू में तीनों महिलाओं को पीड़ित माना गया, लेकिन बाद में एक महिला ने दावा किया कि उसने स्वेच्छा से और माता-पिता की सहमति से यात्रा की थी, और उसे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं और पुलिस के दबाव में ननों के खिलाफ बयान देने के लिए मजबूर किया गया था.