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MP में अडानी के कोयला खदान पर पर्यावरण मंत्रालय के दावे 'झूठे'- कांग्रेस

MP में अडानी के कोयला खदान पर पर्यावरण मंत्रालय के दावें 'झूठे'- Cong

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17 सित. 2025, 06:03 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

जयराम रमेश
जयराम रमेश

नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में अडानी समूह के कोयला खदान पर पर्यावरण मंत्रालय के दावों को ‘झूठा’ बताया है. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) के उस दावे को खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में अडानी समूह की धिरौली कोयला खदान का क्षेत्र संरक्षित क्षेत्र में नहीं आता. 


रमेश ने पिछले सप्ताह के अपने आरोपों को दोहराते हुए कहा कि इस परियोजना की मंजूरी प्रक्रिया में “घोर अनियमितताएं” हुई हैं.


सामाजिक मंच एक्स पर, पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के जवाब को “झूठा” करार दिया. 


उन्होंने 12 सितंबर को आरोप लगाया था कि धिरौली में “मोदानी” ने बिना स्टेज-दो वन मंजूरी के सरकारी और वन भूमि पर पेड़ काटना शुरू कर दिया है, जो वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006 और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (PESA), 1996 का स्पष्ट उल्लंघन है. 


रमेश ने दावा किया कि यह भूमि संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित क्षेत्र में आती है.


केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने रमेश के दावों को “तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक” बताते हुए खारिज किया था. 


मंत्रालय ने कहा कि स्टेज-एक और स्टेज-दो दोनों मंजूरियां दी जा चुकी हैं, और मध्य प्रदेश सरकार से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह भूमि PESA क्षेत्र में नहीं आती और न ही यह पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि FRA, 2006 के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई है.


रमेश ने अब मंत्रालय के इस दावे को “झूठा” बताया है. उन्होंने कहा, “9 अगस्त 2023 को, तत्कालीन कोयला मंत्री ने लोकसभा में स्पष्ट रूप से कहा था कि धिरौली कोयला खदान परियोजना संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत संरक्षित क्षेत्र में आती है.” रमेश ने संसद में साझा की गई कोयला खदानों की सूची की प्रति भी साझा की.


उन्होंने आगे कहा कि FRA, 2006 में केवल व्यक्तिगत वन अधिकार ही नहीं, बल्कि सामुदायिक वन संसाधन अधिकार और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के आवास अधिकार भी शामिल हैं. 


धिरौली कोयला खदान में पांच गाँवों में लगभग 3,500 एकड़ वन भूमि का हस्तांतरण शामिल है, और तीन अन्य गाँव इस वन पर निर्भर हो सकते हैं. रमेश ने दावा किया कि इन आठ गाँवों में तीनों प्रकार के जनजातीय अधिकारों को पहले निपटाना होगा.


रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि 31 मार्च 2022 को सिंगरौली जिला कलेक्टर ने प्रमाणित किया था कि FRA के तहत अधिकारों की पहचान और निपटान की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार की जानकारी के अनुसार, सिंगरौली जिले में सामुदायिक या आवास अधिकारों को अभी तक मान्यता नहीं दी गई है.


इस महीने की शुरुआत में, अडानी समूह ने कहा था कि उसे केंद्रीय कोयला मंत्रालय से धिरौली खदान में खनन शुरू करने की मंजूरी मिल गई है, जो अडानी पावर की सहायक कंपनी महान एनर्जेन लिमिटेड द्वारा प्रबंधित है. 


यह खदान मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी खदानों में से एक है, जो लगभग 27 वर्ग किमी में फैली है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP