सोनिया गांधी का नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम- भाजपा
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पर 1980 में मतदाता सूची में अवैध रूप से नाम शामिल करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया है कि सोनिया गांधी ने उस समय भारत की नागरिकता हासिल करने से पहले ही मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाया था, जो कि निर्वाचन नियमों का उल्लंघन है.
मालवीय ने अपने एक्स हैंडल पर 1980 की मतदाता सूची का एक दस्तावेज साझा करते हुए दावा किया कि सोनिया का नाम उस समय नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल था, जबकि उन्होंने 1983 में ही भारत की नागरिकता प्राप्त की थी. उनके मुताबिक, यह निर्वाचन आयोग के साथ "सांठगांठ" का परिणाम था. मालवीय ने लिखा, "यदि यह निर्वाचन नियमों का उल्लंघन नहीं है, तो और क्या है?"
बीजेपी का दावा और सबूत
बीजेपी का कहना है कि सोनिया गांधी, जिनका जन्म 1946 में इटली में हुआ था और जिनका मूल नाम सनिया माइनो था, ने 1968 में राजीव गांधी से शादी के बाद गांधी परिवार का हिस्सा बनीं. 1980 के लोकसभा चुनाव से पहले उनका नाम पहली बार नई दिल्ली की मतदाता सूची में दर्ज हुआ, जबकि उस समय वे तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सरकारी आवास में रहती थीं. बीजेपी ने आगे दावा किया कि सोनिया का नाम 1982 तक मतदाता सूची में रहा, जबकि उनकी नागरिकता 1983 में मिली.
मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा, "मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए भारतीय नागरिकता अनिवार्य है. 1982 में विवाद और आलोचना के बाद सोनिया का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था. 1983 में नागरिकता मिलने के बाद उनका नाम फिर से सूची में शामिल हुआ." हालांकि, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1983 में दोबारा नाम शामिल होने में भी कई अनियमितताएं थीं, क्योंकि सोनिया को अप्रैल 1983 में नागरिकता मिली थी, जबकि उस वर्ष के लिए मतदाता सूची में नाम 1 जनवरी से पहले की नागरिकता के आधार पर ही शामिल होना चाहिए था.
कांग्रेस का पलटवार
बीजेपी के इन आरोपों के जवाब में कांग्रेस ने भी पलटवार किया है. बिहार से कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि इस मामले में सोनिया गांधी ने स्वयं मतदाता सूची में नाम शामिल करने का अनुरोध नहीं किया था. उन्होंने कहा, "इसके लिए निर्वाचन आयोग जिम्मेदार है. उस समय के निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने स्वतंत्र रूप से यह निर्णय लिया था." अनवर ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "आज हम देख रहे हैं कि निर्वाचन आयोग बीजेपी का ही एक हिस्सा बन गया है. उसे इस स्थिति से जल्द बाहर निकलना चाहिए."
हालिया विवादों की पृष्ठभूमि
यह विवाद उस समय सामने आया है, जब हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने महाराष्ट्र, कर्नाटक और हरियाणा के चुनावों में निर्वाचन आयोग पर कथित धांधली का आरोप लगाया था. राहुल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़े पेश करते हुए दावा किया था कि इन राज्यों में मतदाता सूची में गड़बड़ी हुई थी. इसके जवाब में संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने राहुल से हलफनामा मांगा है और संवैधानिक संस्था की अवमानना का नोटिस भी जारी किया है.
इस बीच, बीजेपी ने सोनिया गांधी के मामले को उठाकर कांग्रेस पर पलटवार किया है. बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने राहुल के आरोपों को "पूरी तरह से झूठा और गलत आंकड़ों पर आधारित" बताया है.
आगे क्या?
यह विवाद देश भर में चर्चा का विषय बन गया है. एक ओर बीजेपी सोनिया गांधी के खिलाफ 45 साल पुराने दस्तावेजों के आधार पर गंभीर आरोप लगा रही है, वहीं कांग्रेस इसे निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाने का मौका मान रही है. इस मामले में आगे की जांच और दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी की संभावना है.