रजिस्ट्री शुल्क आधा करने पर महिलाओं की हिस्सेदारी 41% हुई
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ सरकार की एक नई नीति ने राज्य के संपत्ति बाजार में बड़ा बदलाव ला दिया है. महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और संपत्ति पर उनका अधिकार बढ़ाने के उद्देश्य से रजिस्ट्री शुल्क को आधा करने के फैसले के बाद महिलाओं के नाम पर होने वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री में भारी उछाल दर्ज किया गया है.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महज दो महीनों के भीतर ही कुल संपत्ति पंजीकरण में महिलाओं की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत पर पहुंच गई है.
कैबिनेट द्वारा 15 अप्रैल को मंजूर की गई और 6 मई से लागू हुई इस नीति के तहत महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकरण शुल्क को 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया था. इसके सकारात्मक परिणाम तुरंत सामने आए हैं.
6 मई से 30 जून के बीच महिलाओं के नाम पंजीकृत संपत्ति दस्तावेजों की संख्या 21,292 तक पहुंच गई, जो पिछले साल इसी अवधि में 14,668 थी. यह लगभग 45 प्रतिशत की सीधी वृद्धि को दर्शाता है. जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर जैसे जिलों में इस योजना का सबसे शानदार असर देखा गया है, जहां 20 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है.
इस फैसले से एक ओर जहां राज्य सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को 50.14 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय राहत मिली है.
जमीन और संपत्ति को हमेशा से पारिवारिक निर्णय और आर्थिक सुरक्षा का मुख्य आधार माना जाता रहा है. ऐसे में पंजीयन शुल्क में छूट ने परिवारों को महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है. यह पहल न केवल महिलाओं की वित्तीय स्थिरता को मजबूत कर रही है, बल्कि पारिवारिक निर्णयों में उनकी भूमिका को भी नया आधार दे रही है.