ट्रंप क्यूबा को आर्थिक रूप से पंगु कर सत्ता बदल पायेंगे?
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा के साम्यवादी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है. ट्रंप का हालिया दांव क्यूबा की 'लाइफलाइन' माने जाने वाले तेल और विदेशी धन की आपूर्ति को पूरी तरह ठप करना है. 3 जनवरी को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण और वहां के तेल उद्योग पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद, अब ट्रंप की नजरें हवाना पर टिक गई हैं.
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट चेतावनी देते हुए लिखा है, "क्यूबा को अब कोई तेल या पैसा नहीं मिलेगा-जीरो! मैं उन्हें सुझाव देता हूं कि वे बहुत देर होने से पहले एक समझौता कर लें." ट्रंप के इस रुख ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आर्थिक नाकेबंदी के जरिए क्यूबा में सत्ता परिवर्तन का उनका सपना हकीकत बन पाएगा?
ट्रंप की इस रणनीति का असर अब मेक्सिको पर भी दिखने लगा है. मेक्सिको, जो वेनेजुएला के बाद क्यूबा का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता रहा है, उसने अपनी तेल खेप रोक दी है. हालांकि मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शिनबाम ने इसे एक "संप्रभु निर्णय" बताया है, लेकिन विश्लेषक इसे ट्रंप प्रशासन द्वारा दी जा रही व्यापारिक शुल्कों और सैन्य कार्रवाई की धमकियों का नतीजा मान रहे हैं.
मेक्सिको वर्तमान में अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौतों पर बातचीत कर रहा है और वह क्यूबा के साथ अपनी दोस्ती के लिए वाशिंगटन से बैर मोल लेने की स्थिति में नहीं है. क्यूबा अपनी जरूरत का 44 प्रतिशत तेल मेक्सिको से और 33 प्रतिशत वेनेजुएला से लेता था. इन दोनों रास्तों के बंद होने से क्यूबा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमराने की कगार पर है.
अमेरिकी प्रशासन अब क्यूबा के भीतर उन "इनसाइडर्स" की तलाश कर रहा है जो साम्यवादी शासन को हटाने के लिए वाशिंगटन के साथ गुप्त डील कर सकें. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप का लक्ष्य 2026 के अंत तक क्यूबा में सत्ता परिवर्तन करना है.
ट्रंप ने यहां तक संकेत दिया है कि क्यूबा के मूल के अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस द्वीप राष्ट्र के भविष्य के राष्ट्रपति हो सकते हैं. वाशिंगटन का मानना है कि जब बिजली नहीं होगी, भोजन की कमी होगी और पर्यटन से होने वाली कमाई (जो पहले ही 70 प्रतिशत गिर चुकी है) ठप हो जाएगी, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर फूटेगा और सरकार खुद-ब-खुद गिर जाएगी.
हालांकि, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज़-कानेल ने किसी भी तरह के समझौते या आत्मसमर्पण से इनकार किया है. उन्होंने इसे "अंतरराष्ट्रीय डकैती" करार देते हुए कहा है कि क्यूबा दशकों से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और वह अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा.
लेकिन इस बार चुनौती कहीं अधिक गंभीर है क्योंकि क्यूबा का सबसे बड़ा मददगार वेनेजुएला अब उसके हाथ से निकल चुका है. ट्रंप की "जीरो ऑयल" नीति ने क्यूबा को एक ऐसे अंधेरे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां से बाहर निकलने का रास्ता या तो एक अपमानजनक समझौता है या फिर पूरी शासन व्यवस्था का पतन. आने वाले महीने यह तय करेंगे कि क्या ट्रंप की यह 'आर्थिक जंग' साम्यवाद के गढ़ को ढहाने में सफल होती है या नहीं.