क्या नेतन्याहू की शर्तें बनेंगी समझौते में बाधा?
वाशिंगटन/तेहरान । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ चल रही परमाणु वार्ताओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने अपने राजनयिक प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे ईरान के साथ किसी भी समझौते को जल्दबाजी में अंतिम रूप न दें. ट्रम्प का मानना है कि समय वर्तमान में अमेरिका के पक्ष में है. ट्रम्प ने दावा किया कि यह बातचीत रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रही है और यह साल 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान हुए संयुक्त व्यापक कार्ययोजना (जेसीपीओए) के बिल्कुल विपरीत है.
ट्रम्प ने ओबामा प्रशासन के उस समझौते को अमेरिकी इतिहास के सबसे खराब समझौतों में से एक बताया है और कहा कि वह समझौता ईरान के लिए परमाणु हथियार बनाने का एक सीधा रास्ता था. ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के साथ अमेरिका के संबंध अब अधिक पेशेवर और उत्पादक हो रहे हैं, लेकिन तेहरान को यह स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि उसे किसी भी कीमत पर परमाणु बम विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
मध्य पूर्व के नेताओं से ट्रम्प की बातचीत
इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने मध्य पूर्व के कई प्रमुख मुस्लिम देशों के नेताओं से फोन पर बात की और उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया. इन नेताओं में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुर्रहमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी शामिल हैं.
ट्रम्प ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी विस्तृत चर्चा की, जिसके बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने पर सहमति बनने की बात कही जा रही है.
इजरायल का कड़ा रुख और नेतन्याहू की शर्तें
हालांकि, इस संभावित समझौते की राह में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख एक बड़ी पेचीदगी पैदा कर सकता है. नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने ट्रम्प के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के समझौता ज्ञापन और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगामी अंतिम वार्ता को लेकर बात की है.
नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ किसी भी अंतिम समझौते में परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए, जिसका सीधा मतलब ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों को पूरी तरह नष्ट करना और उसके संवर्धित परमाणु कचरे को उसकी सीमा से बाहर निकालना है.
नेतन्याहू ने ट्रम्प के साथ अपनी एक तस्वीर साझा करते हुए कड़े शब्दों में लिखा कि ईरान के पास कभी परमाणु बम नहीं होगा.
विशेषज्ञों का विश्लेषण और संभावित चुनौतियां
इजरायली विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान अमेरिकी प्रशासन के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि यदि यह कूटनीतिक ढांचा इजरायल के मानकों पर खरा नहीं उतरा, तो इजरायल स्वतंत्र रूप से सैन्य अभियान शुरू करने के लिए तैयार है.
मध्य पूर्व के विश्लेषकों का यह भी कहना है कि नेतन्याहू भले ही ट्रम्प प्रशासन का खुलकर विरोध न करें, लेकिन इजरायल लेबनान जैसे द्वितीयक मोर्चों का उपयोग करके कार्यान्वयन प्रक्रिया को जटिल बना सकता है, ताकि वाशिंगटन इस बातचीत को छोड़ने पर मजबूर हो जाए.
ईरान की प्रतिक्रिया और समझौते के नियम
दूसरी ओर, ईरानी खेमे में इस समझौते को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं. ईरानी सूत्रों के अनुसार, यदि ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद इस मसौदे को मंजूरी देती, तो इसे अंतिम अनुसमर्थन के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजताबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा.
हालांकि, ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी ने बताया है कि कुछ प्रमुख धाराओं पर अभी भी मतभेद बरकरार हैं और अगर अमेरिका नए अवरोध पैदा करना जारी रखता है, तो कोई अंतिम समझौता नहीं होगा.
ईरान के अधिकारियों का आरोप है कि वे कूटनीतिक बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है और नई अत्यधिक मांगें रख रहा है. इस संभावित समझौते के तहत ईरान पर लगे अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह से हटाया जाना है और पहले चरण में ईरान के फ्रीज किए गए फंड को भी जारी किया जाना है.
ट्रम्प को घरेलू राजनीति में विरोध का सामना
इस बीच, अमेरिकी घरेलू राजनीति में भी ट्रम्प को अपने ही कट्टर समर्थक वर्ग से तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ रहा है, जहां आलोचकों का कहना है कि किसी भी कमजोर समझौते से ईरान के खिलाफ चलाया गया पूरा सैन्य अभियान व्यर्थ साबित हो जाएगा.