रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

पाकिस्तान और अफगानिस्तान क्यों लड़ रहे हैं?

C

CG Khabar

27 फ़र. 2026, 07:12 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

पाक-अफगान नक्शा
पाक-अफगान नक्शा

रायपुर । संवाददाता: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच छिड़ा वर्तमान "खुले युद्ध" का संकट कोई अचानक उपजी घटना नहीं है, बल्कि यह दशकों पुराने सीमा विवाद और उग्रवाद के जटिल जाल का परिणाम है. इस संघर्ष की सबसे बुनियादी जड़ 'डूरंड लाइन' है. 2,611 किलोमीटर लंबी यह सीमा रेखा ब्रिटिश काल में खींची गई थी, जिसे अफगानिस्तान की कोई भी सरकार, चाहे वह पिछली लोकतांत्रिक सरकार हो या वर्तमान तालिबान प्रशासन, अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में मान्यता नहीं देती. 


अफगान पक्ष का मानना है कि यह रेखा पश्तून समुदायों को कृत्रिम रूप से विभाजित करती है. जब से 2021 में तालिबान ने काबुल की सत्ता संभाली है, इस सीमा पर बाड़ लगाने और सैन्य चौकियां बनाने को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है.

विज्ञापन


युद्ध का दूसरा और सबसे तात्कालिक कारण 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) का मुद्दा है. पाकिस्तान का स्पष्ट आरोप है कि अफगान तालिबान अपनी सरजमीं पर टीटीपी के उग्रवादियों को पनाह दे रहा है, जो वहां सुरक्षित ठिकानों से पाकिस्तान के भीतर सुरक्षा बलों और नागरिकों पर हमले करते हैं. 


पाकिस्तान की मांग रही है कि काबुल इन समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, लेकिन अफगान तालिबान वैचारिक संबंधों और आंतरिक गुटबाजी के डर से ऐसा करने में विफल रहा है. 

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के अनुसार, बार-बार की कूटनीतिक चेतावनियों के बावजूद जब सीमा पार से हमले नहीं थमे, तो इस्लामाबाद का "सब्र का प्याला" भर गया, जिसके परिणामस्वरूप काबुल और कंधार जैसे शहरों पर हवाई हमले शुरू किए गए.


वहीं, अफगानिस्तान का तर्क है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं का दोष उन पर मढ़ रहा है. तालिबान प्रशासन का दावा है कि पाकिस्तान की हवाई कार्रवाई में निर्दोष नागरिक और महिलाएं मारी जा रही हैं, जिसके जवाब में उन्होंने "बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान" शुरू किया है. 


जानकारों का मानना है कि यह युद्ध इसलिए गहरा रहा है क्योंकि एक तरफ पाकिस्तान अपनी संप्रभुता और आंतरिक शांति के लिए उग्रवाद को जड़ से मिटाना चाहता है, तो दूसरी तरफ अफगान तालिबान अपनी जमीन पर मौजूद सशस्त्र समूहों पर नियंत्रण खोने या उनके साथ टकराव मोल लेने से बच रहा है. 


इस खींचतान ने डूरंड लाइन को एक युद्ध क्षेत्र में बदल दिया है, जहां कूटनीति की जगह अब भारी तोपखाने और हवाई हमलों ने ले ली है. संक्षेप में, यह युद्ध जमीन के मालिकाना हक (सीमा विवाद) और उग्रवाद के प्रति विरोधाभासी दृष्टिकोणों के बीच का टकराव है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP