ICE अधिकारियों को 'इलेक्ट्रिक शॉक ग्लव्स' क्यों दिए जा रहे हैं?
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) अपने अधिकारियों और एजेंटों को हिंसक या असहयोगी स्थिति में व्यक्तियों पर तुरंत काबू पाने और उनकी आज्ञापालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 'इलेक्ट्रिक शॉक ग्लव्स' मुहैया कराने जा रहा है. गृह सुरक्षा विभाग (DHS) के अनुसार, मैदान में तैनात अधिकारियों को अक्सर ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ता है जहाँ तुरंत नियंत्रण पाना आवश्यक होता है. यह तकनीक व्यक्ति के त्वरित जवाब देने या मुकाबला करने की क्षमता को बाधित कर देती है, जिससे अधिकारी बिना किसी बड़े शारीरिक टकराव के स्थिति को नियंत्रण में ले सकते हैं.
विभाग ने मार्च तक ऐसे हजारों "कंडक्टिव डिस्ट्रैक्शन एंड डी-एस्केलेशन डिवाइस" खरीदने के लिए लगभग $20 मिलियन (लगभग ₹160 करोड़) का बजट तय किया है. 'G.L.O.V.E.' (जनरेटेड लो आउटपुट वोल्टेज एमीटर) नाम के इन दस्तानों को केंटकी स्थित 'कंप्लाइंट टेक्नोलॉजीज LLC' द्वारा तैयार किया गया है और इसका उपयोग अमेरिका की कुछ जेलों व पुलिस बलों द्वारा पहले भी किया जा चुका है.
कौन कर रहा है इसका विरोध?
इस फैसले की जानकारी सामने आते ही मानवाधिकार संगठनों और नागरिक अधिकार समूहों की ओर से इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है:
अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU): प्रमुख मानवाधिकार संगठन ACLU ने इस कदम पर सख्त आपत्ति जताई है. संगठन का कहना है कि आव्रजन एजेंटों को हाथों में छिपाकर अत्यधिक दर्द देने वाला यह साधन सौंपना जनता की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित होगा. इससे अधिकारियों की जवाबदेही कम होगी और मानवाधिकारों के उल्लंघन का खतरा बढ़ेगा.
नागरिक अधिकार और आव्रजन समर्थक समूह: विभिन्न नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस प्रकार के गुप्त और दर्दनाक उपकरणों के उपयोग से बल प्रयोग के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है और आव्रजकों के साथ दुर्व्यवहार की आशंका गहरा जाएगी.
प्रशासन की सफाई
चौतरफा विरोध के बीच गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अपने कदम का बचाव किया है. विभाग का कहना है कि ICE अधिकारी स्थिति को शांत करने (डी-एस्केलेशन) और बल प्रयोग की सीमाओं से जुड़ा नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं. DHS के प्रवक्ता के मुताबिक, एजेंसी द्वारा अपनाई जाने वाली हर तकनीक की कड़ी समीक्षा की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसका इस्तेमाल कानून प्रवर्तन के तय मानकों और नीतियों के दायरे में ही हो.