पीएम मोदी की अपील पर क्या कहता है विदेशी मीडिया?
नई दिल्ली । डेस्क: अल जज़ीरा के अनुसार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अस्थिरता से बचाने के लिए नागरिकों से कुछ कड़े और अनुशासित फैसले लेने की अपील की है. दक्षिण भारत के हैदराबाद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने भारतीयों से अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से बचने, सोना न खरीदने और संभव हो तो वर्क फ्रॉम होम (WFH) अपनाने का आग्रह किया. विदेशी मीडिया इसे 'आर्थिक देशभक्ति' के आह्वान के रूप में देख रहा है.
ईरान-इजरायल युद्ध का भारत पर असर
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है. युद्ध की शुरुआत से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत $72.87 प्रति बैरल थी, जो अब 50 प्रतिशत से अधिक बढ़कर $105 के पार जा चुकी है. विदेशी विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए चिंता पैदा कर दी है. चूंकि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी यहीं से गुजरता है, इसलिए आपूर्ति बाधित होने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ रहा है.
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट
अल जज़ीरा ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $690.69 बिलियन था, जो मार्च के अंत की तुलना में लगभग $7.79 बिलियन कम है. युद्ध शुरू होने से पहले यह भंडार $728.5 बिलियन था. विदेशी विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 2026 में भारत के चालू खाता घाटे (CAD) के $84 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. इसका मतलब है कि भारत अपनी कमाई से अधिक खर्च कर रहा है, और यही कारण है कि पीएम मोदी ने नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने पर जोर दिया है.
वर्क फ्रॉम होम और ईंधन की बचत: 'कोविड मॉडल' की वापसी
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि लोग भौतिक बैठकों के बजाय ऑनलाइन मीटिंग्स को प्राथमिकता दें और कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाए गए 'वर्क फ्रॉम होम' मॉडल को फिर से अपनाएं. विदेशी मीडिया इसे एक रणनीतिक कदम मान रहा है ताकि देश के ईंधन आयात बिल को कम किया जा सके. पीएम मोदी ने सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग का उपयोग करने तथा खाना पकाने के तेल के उपयोग में कटौती करने का भी आह्वान किया, जिसे उन्होंने 'स्वस्थ और देशभक्ति' का प्रतीक बताया.
सोना और विदेश यात्रा: गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने $72 बिलियन का सोना आयात किया. साथ ही, भारतीयों ने विदेश यात्राओं पर लगभग $31.7 बिलियन खर्च किए. पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कम से कम एक साल के लिए गैर-जरूरी विदेशी दौरों और सोने की खरीद से बचा जाना चाहिए ताकि कीमती विदेशी मुद्रा बचाई जा सके.
खेती और उर्वरक
आत्मनिर्भरता की ओर कदमयुद्ध के कारण उर्वरकों (खासकर यूरिया) की वैश्विक आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. भारत यूरिया का दुनिया का सबसे बड़ा आयातक है. पीएम मोदी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग आधा करने की अपील की है ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और देश का पैसा बाहर न जाए.
विदेशी मीडिया के अनुसार, तेल और उर्वरक ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें कटौती करना सरकार के लिए कठिन है क्योंकि ये अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ऐसे में सरकार के पास केवल सोना और पर्यटन जैसे 'डिस्क्रेशनरी' (विवेकधीन) खर्चों को नियंत्रित करने का ही विकल्प बचता है. हालांकि, यह देखना बाकी है कि क्या आम भारतीय अपनी जीवनशैली में इन बदलावों को स्वीकार करेंगे. पीएम मोदी के शब्दों में, "देशभक्ति का मतलब केवल सीमा पर जान देना ही नहीं है, बल्कि देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को दैनिक जीवन में निभाना भी है."