शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

SIR से पश्चिम बंगाल में किसे लाभ होगा, TMC या BJP को?

C

CG Khabar

21 दिस. 2025, 08:17 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

मोदी-ममता
मोदी-ममता

नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिन 77 सीटों पर जीत दर्ज की थी, उनमें से 50 प्रतिशत से अधिक सीटों पर मतदाताओं के हटाए गए नामों की संख्या जीत के अंतर से कहीं ज्यादा है.


नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी की नंदीग्राम सीट इसका प्रमुख उदाहरण है. 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से हराया था, जबकि इस विधानसभा क्षेत्र में 10,599 मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं.


अब तक पूरे राज्य में 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं. चुनाव आयोग के अनुसार इनमें मृत, लापता और स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता शामिल हैं. ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद BJP की 77 में से 42 सीटों पर स्थिति यह है कि हटाए गए मतदाताओं की संख्या पार्टी की जीत के अंतर से अधिक है.


उत्तर बंगाल, जिसे 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से BJP का गढ़ माना जाता रहा है, वहां भी बड़ा असर दिख रहा है. 2021 में BJP की 23 सीटें उत्तर बंगाल से आई थीं, जिनमें से 10 सीटों पर हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से ज्यादा है. कूचबिहार जिले की दिनहाटा सीट पर BJP की जीत का अंतर मात्र 57 वोट था, जबकि यहां 16,442 मतदाताओं के नाम काटे गए हैं. कूचबिहार उत्तर और दक्षिण सीटों पर भी यही स्थिति है.


दक्षिण बंगाल के नदिया, उत्तर 24 परगना, हुगली, पूर्व और पश्चिम मिदनापुर, बांकुड़ा, पुरुलिया और बर्दवान जैसे जिलों में भी बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं. औद्योगिक क्षेत्र बर्दवान की आसनसोल दक्षिण और कुल्टी सीटों पर 13 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि 2021 में यहां BJP की जीत का अंतर बेहद कम था.


प्रदेश BJP अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य का कहना है कि फरवरी में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने पर और नाम हटाए जाएंगे. BJP का दावा है कि यह प्रक्रिया सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी. वहीं, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने माना कि शहरी और औद्योगिक इलाकों में BJP पर भी इसका असर पड़ सकता है.


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चूंकि राज्य में सत्ता तृणमूल के पास है, इसलिए मतदाता सूची के शुद्धिकरण से विपक्ष की तुलना में सत्तारूढ़ दल पर ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी “घुसपैठियों” के मुद्दे को फिर से उठाते हुए SIR का समर्थन किया है.


हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार की तरह बंगाल में भी घुसपैठ का सवाल अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है और अंतिम मतदाता सूची के बाद ही इसका वास्तविक राजनीतिक असर साफ होगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP