दरगाहों और उर्स में डीजे, पटाखे और डांस पर वक्फ बोर्ड ने लगाया प्रतिबंध
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने राज्य भर की सभी दरगाहों और मजारों पर उर्स तथा अन्य धार्मिक जुलूसों के दौरान डीजे, तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम, म्यूजिकल बैंड, आतिशबाजी और गैर-पारंपरिक नृत्य प्रदर्शनों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है.
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज ने इस आदेश की घोषणा करते हुए साफ किया है कि यदि कोई व्यक्ति या प्रबंध समिति इस नियम का उल्लंघन करती है, तो उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. इसके साथ ही, बोर्ड प्रतिबंधित संगीत उपकरणों को जब्त करने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगा और नियमों की अनदेखी करने वाली समितियों की आधिकारिक मान्यता भी रद्द कर सकता है.
यह फैसला रायपुर के एक धार्मिक और सामाजिक संगठन 'जमात रजा-ए-मुस्तफा' द्वारा सौंपे गए एक औपचारिक प्रतिवेदन के बाद लिया गया है. संगठन ने अपनी शिकायत में कहा था कि पवित्र अवसरों पर लाउड डीजे, कमर्शियल बैंड और अश्लील नृत्य जैसी गतिविधियां आध्यात्मिक पवित्रता को कम करती हैं, सार्वजनिक शांति को भंग करती हैं और समाज पर गलत प्रभाव डालती हैं. ये प्रथाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों और शरिया सिद्धांतों के खिलाफ हैं.
वक्फ बोर्ड द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि उर्स के आयोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारा, सामाजिक सद्भाव और शांति को बढ़ावा देना है, इसलिए इन पवित्र स्थलों पर धार्मिक माहौल बनाए रखना बेहद जरूरी है. इसके अलावा, बोर्ड ने संदल-चादर की रस्म के लिए रात 11 बजे की समय-सीमा भी तय की है.
इस आदेश को कड़ाई से लागू करने के लिए अध्यक्ष सलीम राज ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बस्तर और सरगुजा सहित सभी जिलों के संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी कर दिए हैं.
साथ ही, मस्जिदों के इमामों और प्रबंधन समितियों को भी कहा गया है कि वे शुक्रवार की नमाज के दौरान इस गाइडलाइन की घोषणा करें ताकि लोगों में जागरूकता फैले और इसका पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जा सके.