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'वॉक फॉर पीस': वैश्विक शांति संदेश लेकर लुम्बिनी पहुंचे भिक्षु

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15 जून 2026, 06:34 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

'वॉक फॉर पीस': अलोका
'वॉक फॉर पीस': अलोका

काठमांडू । डेस्क: वैश्विक स्तर पर शांति और सद्भाव का संदेश फैलाने के उद्देश्य से शुरू हुआ बौद्ध भिक्षुओं का प्रसिद्ध आंदोलन "वॉक फॉर पीस" अब बुद्ध की जन्मस्थली नेपाल के लुम्बिनी पहुंच चुका है. अमेरिका में 108 दिनों तक लगभग 3,700 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद इस आध्यात्मिक दल ने रविवार शाम को नेपाल की धरती पर कदम रखा. 


वियतनामी-अमेरिकी मूल के भिक्षु भिक्खु पन्नाकर के नेतृत्व में 18 सदस्यीय इस दल में 4 भिक्षु और 14 अनुयायी शामिल हैं. लुम्बिनी पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन और लुम्बिनी विकास ट्रस्ट के प्रतिनिधियों ने मायादेवी मंदिर परिसर में इस शांति यात्रा का भव्य स्वागत किया. इस अवसर पर भिक्षुओं ने पवित्र शाश्वत शांति लौ क्षेत्र से मायादेवी मंदिर तक माइंडफुल पीस वॉक की और विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की.

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इस पूरी यात्रा का सबसे बड़ा और अनोखा आकर्षण 'आलोका' नाम का एक भारतीय रेस्क्यू डॉग (कुत्ता) है, जो भिक्षुओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है. माथे पर प्राकृतिक रूप से बने दिल के आकार के निशान और अपने शांत स्वभाव के कारण आलोका सोशल मीडिया पर एक ग्लोबल सेलिब्रिटी बन चुका है, जिसके लाखों फॉलोअर्स हैं. 


आलोका की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी है. साल 2022 में भारत में एक यात्रा के दौरान उसने भिक्षु पन्नाकर का पीछा करना शुरू किया था. नेपाल सीमा के पास बीमार होने पर भिक्षु ने उसे बचाया और उसका नाम 'आलोका' (दिव्य प्रकाश) रखा. 


जब 2025 में अमेरिका में इस बड़ी यात्रा की रूपरेखा तैयार हुई, तो आलोका को विशेष रूप से कोलकाता से टेक्सस ले जाया गया. दक्षिण कैरोलिना में पैर की चोट के कारण उसकी सर्जरी भी करानी पड़ी, लेकिन उसने हार नहीं मानी.


इस वैश्विक शांति पहल की शुरुआत पिछले साल 26 अक्टूबर 2025 को फोर्ट वर्थ, टेक्सस के हुआंग दाओ विपश्यना भावना केंद्र से हुई थी. वहां से लुइसियाना, मिसिसिपी, अलबामा, जॉर्जिया और वर्जीनिया जैसे कई अमेरिकी राज्यों से होते हुए यह दल नंगे पैर चलकर 10 Fabian 2026 को वाशिंगटन डीसी पहुंचा था. 


यात्रा के दौरान भिक्षुओं को कड़े शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ा. पत्थरों, कीलों, कांच के टुकड़ों और तपती सड़कों के कारण उनके पैर लहूलुहान हुए. इतना ही नहीं, 11 नवंबर 2025 को टेक्सस के डेटन में एक भीषण सड़क हादसे में एस्कॉर्ट वाहन की टक्कर से भिक्षु महा दम फोममसान का बायां पैर काटना पड़ा था. इस बड़ी त्रासदी के बावजूद, दल ने हिम्मत नहीं हारी और अपना सफर जारी रखा.


भिक्खु पन्नाकर ने लुम्बिनी में आयोजित स्वागत समारोह में कहा कि शांति की शुरुआत किसी देश या सरकार से नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के भीतर से होती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बौद्ध दर्शन को शब्दों से निकालकर वास्तविक जीवन में उतारना ही इस कठिन यात्रा का मुख्य उद्देश्य है. 


लुम्बिनी विकास ट्रस्ट के कार्यवाहक सदस्य-सचिव ज्ञानिन राय ने कहा कि इस यात्रा से लुम्बिनी के आध्यात्मिक महत्व को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिलेगी और यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. 


भारत में एक सप्ताह बिताने के बाद सुनौली सीमा से नेपाल में प्रवेश करने वाला यह दल मंगलवार को काठमांडू से दिल्ली के लिए रवाना होगा. अमेरिका में लाखों लोगों को ध्यान, करुणा और नैतिक आचरण की प्रेरणा देने वाली यह यात्रा अब दक्षिण एशिया में शांति का उजाला फैला रही है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP