सुकमा में हिंसक झड़प: पूर्व सरपंच समेत 10 पर FIR, 13 घायल
सुकमा । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के साडरापाल गांव में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में कम से कम 13 लोग घायल हो गए हैं. इस घटना को लेकर पुलिस और छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के दावों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है. पुलिस जहां इसे शुद्ध रूप से जमीन और आपसी रंजिश का मामला बता रही है, वहीं क्रिश्चियन फोरम ने इसे प्रार्थना सभा कर रहे ईसाई समुदाय के लोगों पर टारगेटेड हमला करार दिया है.
इस मामले में तोंगपाल थाना पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गांव के पूर्व सरपंच हुड़माराम माड़वी समेत 10 नामजद ग्रामीणों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
जमीन विवाद को लेकर लाठी-डंडों से हमला: शिकायतकर्ता का आरोप
तोंगपाल थाने में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, साडरापाल निवासी हिड़मा कवासी ने आरोप लगाया है कि गांव के पूर्व सरपंच हुड़माराम माड़वी अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और जमीन से जुड़े एक पुराने विवाद को लेकर गाली-गलौज शुरू कर दी. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने जान से मारने की धमकी देते हुए लाठी-डंडों, घूंसों और लातों से हमला कर दिया.
इस मारपीट में शिकायतकर्ता हिड़मा कवासी के सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आई हैं, जबकि उनकी पत्नी की पीठ और कमर में गंभीर सूजन है. झड़प में दोनों पक्षों के अन्य ग्रामीण भी घायल हुए हैं. शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि जमीन से जुड़ी शिकायतों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव का माहौल था.
क्रिश्चियन फोरम का बड़ा दावा: 'प्रार्थना कर रहे लोगों पर बरसाए गए डंडे'
इस घटनाक्रम में तब एक नया मोड़ आ गया जब छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम ने इसे धार्मिक रंग दिए जाने का आरोप लगाया. फोरम द्वारा जारी एक प्रेस बयान में दावा किया गया है कि रविवार की सुबह ईसाई समुदाय के लोग एक कच्चे (मिट्टी के) मकान में शांतिपूर्वक प्रार्थना कर रहे थे. इसी दौरान लाठियों से लैस कुछ लोग वहां जबरन घुस आए और प्रार्थना कर रहे लोगों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया. फोरम के अनुसार, हमले में कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, हालांकि इस धार्मिक कोण की अभी तक पुलिस या प्रशासन द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
"जब कोर्ट और कानून हैं, तो डंडा क्यों उठाया?" – रत्नेश बेंजामिन
क्रिश्चियन फोरम के प्रदेश उपाध्यक्ष रत्नेश बेंजामिन ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा:
"सरकार ने किसी भी विवाद के निपटारे के लिए पुलिस, थाने और न्यायालय जैसी संस्थाएं बनाई हैं. अगर किसी को कोई आपत्ति या शिकायत थी, तो उन्हें कानूनी रास्ता अख्तियार करना चाहिए था. जब देश में थाना, कोर्ट और कचहरी मौजूद हैं, तो किसी को भी कानून अपने हाथ में लेकर ईसाइयों पर डंडा उठाने का कोई अधिकार नहीं है."
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की हिंसक घटनाएं समाज में वैमनस्यता और नफरत का बीज बोती हैं, जिससे ईसाई समाज के भीतर असुरक्षा और गहरे दुःख की भावना पैदा हो रही है.
पुलिस की कार्रवाई: पूर्व सरपंच समेत इन 10 लोगों पर FIR दर्ज
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तोंगपाल थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है. पुलिस ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर साफ किया है कि यह प्रारंभिक तौर पर भूमि संबंधी और आपसी विवाद का मामला है. प्रार्थी हिड़मा कवासी की रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता) की सुसंगत धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है.
इन आरोपियों के खिलाफ दर्ज हुआ मामला:
हुड़माराम माड़वी (पूर्व सरपंच)
गंगाराम कवासी
बुधरा कवासी
महादेव कवासी
हनीश करटामी
आयता कवासी
लच्छु कवासी
हांदा वेड्डी
गुड़ीराम वेड्डी
सत्रा आयता
पुलिस प्रशासन का कहना है कि गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे.