VB-G RAM G योजना: कांग्रेस ने लगाया 'ग्रामीण मजदूरी चोरी' का गंभीर आरोप
महाराष्ट्र के बीड़ जिले में VB-G RAM G योजना के तहत फर्जी उपस्थिति और मजदूरी में अनियमितता के दावों के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. कांग्रेस का आरोप है कि MGNREGA को खत्म कर लाई गई यह नई योजना ग्रामीण भारत की सुरक्षा पर एक 'सर्जिकल स्ट्राइक' है.
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस ने मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह नया कानून लाकर देश के ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा तंत्र को नुकसान पहुंचाने का बड़ा आरोप लगाया है. पार्टी ने केंद्र के इस कदम को ग्रामीण आजीविका पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' करार देते हुए इसे 'ग्रामीण मजदूरी चोरी' की संज्ञा दी है.
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त बीड़ जिले की स्थिति उजागर की.
रिपोर्ट के अनुसार, नए 'VB-G RAM G' कानून के तहत आधिकारिक कागजों पर हजारों मजदूरों को कार्यरत दिखाया गया है, जबकि पांच प्रमुख स्थलों पर जमीनी जांच के दौरान एक भी मजदूर काम करता हुआ नहीं मिला.
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि बीड़ सहित महाराष्ट्र के कई जिले एक दशक के सबसे भीषण सूखे का सामना कर रहे हैं. ऐसे संकट के समय में मनरेगा मजदूरों के लिए सबसे बड़ा सहारा था, लेकिन इसे हटाकर लागू की गई नई व्यवस्था ने गरीबों के अधिकारों पर हमला किया है.
जयराम रमेश ने दावा किया कि जमीनी जांच से पता चलता है कि ग्रामीणों को महीनों से काम नहीं मिला है, जबकि दस्तावेजों में उन्हें कार्यरत दिखाया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय नेता और सत्ताधारी दल से जुड़े लोग मजदूरों का हक मार रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश और अन्य भाजपा शासित राज्यों में फर्जी उपस्थिति तथा क्लोन ऐप के जरिए हो रहे घोटालों का भी जिक्र किया.
उल्लेखनीय है कि 'VB-G RAM G' अधिनियम 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ है, जिसे 2025 के शीतकालीन सत्र में संसद द्वारा पारित किया गया था. यद्यपि इस नए कानून में रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, लेकिन विपक्ष इसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने और केंद्र व राज्यों के बीच फंडिंग अनुपात को 60:40 किए जाने का लगातार विरोध कर रहा है.
कांग्रेस का कहना है कि यह नया कानून तकनीक-आधारित बेदखली, केंद्रीयकरण और ग्राम पंचायतों को कमजोर करने का काम कर रहा है.