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उत्तराखंड के एक गांव में फैसला: महिलाओं को केवल तीन गहनों की अनुमति

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26 अक्टू. 2025, 05:29 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

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देहरादून । डेस्क: उत्तराखंड के चकराता तहसील के एक छोटे से गांव कंदर ने सामाजिक समानता और परिवारों पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करने के लिए एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया है. गांव के निवासियों ने सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया है कि अब गांव में होने वाले त्योहारों या किसी भी सामाजिक समारोह के दौरान महिलाएं न्यूनतम सोने के गहने ही पहनेंगी.


इस प्रस्ताव के अनुसार, महिलाएं केवल मंगलसूत्र, एक जोड़ी कान के झुमके (ईयररिंग्स), और एक नथ (नोज रिंग) ही पहन सकेंगी. गांव के बुजुर्गों द्वारा लिए गए इस फैसले का उल्लंघन करने वाली महिला पर ₹50,000 का भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

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राज्य की राजधानी देहरादून से लगभग 85 किलोमीटर उत्तर में स्थित, 270 निवासियों वाला यह सुरम्य गांव पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है.


क्यों लिया गया यह निर्णय?

निवासियों का कहना है कि यह निर्णय गांव में अमीरी और गरीबी के बीच की खाई को पाटने के लिए लिया गया है. बैठक में मौजूद एक बुजुर्ग ग्रामीण, सरन सिंह ने बताया, "हमने देखा है कि कुछ गरीब लोग अपनी बेटियों की शादी के लिए गहने खरीदने के लिए अमीर ग्रामीणों से कर्ज लेते हैं और उसे चुका नहीं पाते. ऐसी आदत लोगों को गरीबी की ओर धकेल रही है."


एक अन्य ग्रामीण, भगत सिंह रावत ने कहा कि सोने और अन्य कीमती गहने पहनने की आदत अमीर और गरीब के बीच मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक दूरी को बढ़ाती है. उन्होंने कहा, "हम नहीं चाहते कि हमारे गांव में ऐसा हो. यहाँ हर कोई बराबर है."


महिलाओं ने किया फैसले का स्वागत

गांव की महिलाओं ने इस फैसले का जोरदार स्वागत किया है. 30 वर्षीय वर्षा देवी ने कहा, "कुछ महिलाएं जो अपने सोने के गहनों का दिखावा करती हैं, उनमें श्रेष्ठता का झूठा भाव आ जाता है. कुछ महिलाओं को उनकी उपस्थिति में अपनी सामाजिक स्थिति के बारे में असुरक्षा महसूस होती है. यह एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. बुजुर्गों द्वारा लिया गया यह निर्णय बहुत ही अच्छा है."


55 वर्षीय तुलसा सिंह ने बताया कि कंदर गांव के निवासियों ने इस नए नियम का पालन करना शुरू कर दिया है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, "किसी भी सामाजिक अवसर के लिए मंगलसूत्र, झुमके और नथ काफी हैं. यह समानता (uniformity) देखने में शानदार लगेगी."


इस पहल को सामाजिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो दिखावे की संस्कृति पर लगाम लगाने और गांव में सद्भाव को बढ़ावा देने का प्रयास है.

(AI Generaqted Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP