US वेनेजुएला के तेल पर कब्ज़ा चाहता है- राष्ट्रपति मादुरो
नई दिल्ली । डेस्क: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने आरोप लगाया है कि उनके देश के आसपास कैरेबियन सागर में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा हाल ही में किया गया सैन्य जमावड़ा वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को जब्त करने के उद्देश्य से है.
मादुरो का यह दावा उस समय आया है जब वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति और पेट्रोलियम मंत्री डेल्सी रोड्रिग्ज ने US कोर्ट के उस फैसले की कड़ी निंदा की है, जिसमें अरबों डॉलर के कर्ज का भुगतान करने के लिए वेनेजुएला की तेल कंपनी सिटगो (Citgo) की "धोखाधड़ीपूर्ण" और "जबरन" बिक्री को अधिकृत किया गया है.
रोड्रिग्ज ने इस बिक्री को वेनेजुएला की संप्रभुता पर हमला बताया, जिसका सरकार लगातार विरोध करती रही है. डेलावेयर के जज लियोनार्ड स्टार्क ने सिटगो की मूल कंपनी को एलियट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट से जुड़ी हेज फंड की सहायक कंपनी एम्बर एनर्जी को $5.9 बिलियन में बेचने का आदेश दिया है. ह्यूस्टन स्थित सिटगो, वेनेजुएला की राज्य-स्वामित्व वाली तेल कंपनी PDVSA की सहायक कंपनी है.
सिटगो को $20 बिलियन से अधिक के दावों का सामना करना पड़ रहा है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला के वित्तीय संकट को दर्शाता है. वेनेजुएला के पास 2023 तक दुनिया के सबसे बड़े सिद्ध तेल भंडार (अनुमानित 303 बिलियन बैरल) हैं, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण 2023 में इसका निर्यात गिरकर सिर्फ $4.05 बिलियन रह गया.
राष्ट्रपति मादुरो ने पिछले सप्ताह पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) के साथी सदस्यों से भी अमेरिका और उसके राष्ट्रपति की "बढ़ती और अवैध धमकियों" का मुकाबला करने में उनके देश की मदद करने का आह्वान किया. हालांकि, ग्लोबल पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पाओलो वॉन शिराच ने संदेह व्यक्त किया है कि वेनेजुएला की इस अपील को OPEC के भीतर अधिक समर्थन मिलेगा.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पहले कार्यकाल में लगाए गए कड़े प्रतिबंधों का सामना करने के बाद, वेनेजुएला ने अपने तेल निर्यात को चीन, भारत और क्यूबा जैसे देशों की ओर मोड़ दिया था. हालांकि, PDVSA को प्रतिबंधों के अलावा पुरानी बुनियादी सुविधाओं, कम निवेश और कुप्रबंधन जैसी आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है.